बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर महंगाई की मार: लागत 1.1 लाख करोड़ से बढ़कर 1.98 लाख करोड़, 83% का इजाफा

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अहमदाबाद। देश की पहली और महत्वाकांक्षी अहमदाबाद–मुंबई हाई स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। चार साल से अधिक की देरी के चलते इस ड्रीम प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। जो परियोजना पहले लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये में पूरी होनी थी, उसकी अनुमानित लागत अब बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह शुरुआती स्वीकृत राशि से करीब 83 प्रतिशत अधिक है।

रेलवे बोर्ड ने दी लागत बढ़ने की पुष्टि
सरकार की ‘प्रगति’ पहल के तहत आयोजित एक ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने बताया कि संशोधित लागत पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन नया अनुमान करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। उन्होंने कहा कि लागत पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है और अगले एक-दो महीनों में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

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इस परियोजना को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHRSCL) संचालित कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, लागत बढ़ने के प्रमुख कारणों में भूमि अधिग्रहण में देरी, कानूनी मंजूरियों में लगा लंबा समय और रोलिंग स्टॉक (ट्रेनों) के चयन में हुई देरी शामिल है।

अब तक कितना काम हुआ पूरा?
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, 30 नवंबर तक परियोजना का 55.6 प्रतिशत भौतिक कार्य और 69.6 प्रतिशत वित्तीय प्रगति पूरी हो चुकी है। अब तक इस मेगा प्रोजेक्ट पर 85,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेल मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा करते हुए इस परियोजना को तेज़ी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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पालघर में बड़ी उपलब्धि, रेल मंत्री ने किया निरीक्षण
लागत बढ़ने की खबरों के बीच परियोजना ने एक अहम इंजीनियरिंग उपलब्धि भी हासिल की है। शुक्रवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग के ‘ब्रेकथ्रू’ का निरीक्षण किया। यह सुरंग विरार और बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है और इसे ‘माउंटेन टनल-5’ नाम दिया गया है। रेल मंत्रालय ने इसे इंजीनियरिंग का एक बड़ा उदाहरण बताया है।

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बीकेसी के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का कार्य भी पूरा किया जा चुका है।

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2027 में पहला चरण, 2029 तक पूरा कॉरिडोर
320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के लिए तैयार किए जा रहे इस कॉरिडोर पर भविष्य में जापान की अत्याधुनिक E10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। पर्यावरण के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में लगभग 95 प्रतिशत तक कमी आने का दावा किया गया है।

योजना के अनुसार, सूरत से बिलीमोरा के बीच पहला चरण अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि 508 किलोमीटर लंबा पूरा कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक बनकर तैयार किया जाएगा।

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