महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा चोरी: ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर के बाहर से आदमकद प्रतिमा गायब

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मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। रोविल (Rowville) स्थित ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर के बाहर स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आदमकद कांस्य प्रतिमा को अज्ञात चोर चुरा ले गए। यह प्रतिमा भारत सरकार के इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) द्वारा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय को उपहार स्वरूप प्रदान की गई थी। इस घटना से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय में गहरा आक्रोश और चिंता व्याप्त है।

Mahatma Gandhi’s Bronze Statue Stolen in Melbourne, Indian Community Outraged: स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह सुनियोजित चोरी सोमवार देर रात करीब 12:50 बजे अंजाम दी गई। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि नकाबपोश आरोपी एक सफेद रंग की वैन में मौके पर पहुंचे।

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तीन अज्ञात व्यक्तियों ने एंगल ग्राइंडर की मदद से करीब 426 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा को उसके फाउंडेशन से काटा और अपने साथ ले गए। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि प्रतिमा को टखनों के पास से काटा गया, जिससे मंच पर केवल महात्मा गांधी के पैर ही शेष रह गए हैं।

मामले की जांच विक्टोरिया पुलिस की नॉक्स क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट कर रही है। पुलिस ने आसपास के सभी कबाड़ और स्क्रैप मेटल कारोबारियों को सतर्क कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इतनी भारी कांस्य प्रतिमा या उससे जुड़ा धातु बेचने की कोशिश करता है, तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस को दी जाए। सामुदायिक ट्रस्ट से जुड़े संतोष कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को दे दी गई है और सीसीटीवी फुटेज जांच एजेंसियों को सौंप दी गई है।

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गौरतलब है कि इस प्रतिमा का उद्घाटन 12 नवंबर 2021 को ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन द्वारा किया गया था। दुर्भाग्यवश उद्घाटन के महज 24 घंटे के भीतर ही असामाजिक तत्वों ने प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, जिसके बाद सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे।

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हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भारत से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस चोरी की घटना को भी उसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय समुदाय ने इसे केवल चोरी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अहिंसा और गांधीवादी मूल्यों पर हमला बताया है और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। यह घटना बहुसांस्कृतिक समाज में सहिष्णुता और आपसी सम्मान पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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