हल्द्वानी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई एक सूचना ने देशभर में संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर हुए हजारों करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है। आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया द्वारा दायर आवेदन के जवाब में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर हुए व्यय संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराए हैं।
मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले दस वर्षों में परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर 7,289 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के वित्त प्रभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई है। आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि वर्ष 2023-24 में इस मद में खर्च पहली बार एक हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
हेमंत गौनिया ने आरटीआई पोर्टल के माध्यम से आवेदन संख्या MOHFW/R/X/25/00531/1 दायर कर परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर हुए खर्च, बजट और अन्य संबंधित जानकारियां मांगी थीं। इसके जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन वित्त प्रभाग ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर विस्तृत जानकारी साझा की।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि किसी एक गतिविधि के लिए अलग-अलग जारी नहीं की जाती, बल्कि एकमुश्त अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है ताकि राज्य अपनी स्थानीय जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार उसका उपयोग कर सकें।
आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर 576.90 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,017.74 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में भी 917.79 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। इन सभी वर्षों को मिलाकर कुल खर्च 7,289 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि उपलब्ध कराए गए आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय निगरानी रिपोर्ट (एफएमआर) पर आधारित हैं। यानी यह आंकड़े राज्यों द्वारा सरकार को उपलब्ध कराए गए आधिकारिक वित्तीय अभिलेखों से संकलित किए गए हैं।
आरटीआई जवाब में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। मंत्रालय के अनुसार आवेदन में मांगी गई कुछ सूचनाएं अन्य प्रभागों और विभागों के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं। ऐसे में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभागों को अग्रेषित कर दिया गया है। इससे संभावना है कि आने वाले समय में परिवार नियोजन कार्यक्रमों से जुड़ी और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
इस मामले में हेमंत गौनिया का कहना है कि मंत्रालय से प्राप्त जानकारी पूरे मामले का केवल पहला चरण है। आवेदन के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी विभिन्न विभागों से जवाब मिलना बाकी है। सभी सूचनाएं मिलने के बाद पूरे मामले का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।
आरटीआई के माध्यम से सामने आए ये आंकड़े सरकारी योजनाओं में होने वाले खर्च की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वहीं, यह सवाल भी उठने लगा है कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर खर्च किए गए हजारों करोड़ रुपये का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर कितना पहुंचा और इन योजनाओं ने जनसंख्या स्थिरीकरण तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार के लक्ष्यों को किस हद तक हासिल किया।

