बजट में बड़ा रणनीतिक दांव: भारत में बनेंगे रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर, चीन पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी

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चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर, खनन से लेकर सप्लाई चेन तक मिलेगा नया इंफ्रास्ट्रक्चर

नई दिल्ली: वित्त मंत्री ने संसद में बजट पेश करते हुए देश के रणनीतिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर एक अहम और दूरगामी घोषणा की है। सरकार ने देश में रेयर अर्थ मिनरल (Rare Earth Minerals) के लिए विशेष कॉरिडोर विकसित करने का ऐलान किया है। इस पहल का सीधा उद्देश्य इस संवेदनशील और अहम सेक्टर में भारत को आत्मनिर्भर बनाना और वर्षों से चली आ रही चीन पर निर्भरता को समाप्त करना है। वित्त मंत्री ने बताया कि ये विशेष कॉरिडोर देश के चार राज्यों में विकसित किए जाएंगे, जिससे रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन को मजबूती और गति मिलेगी।

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Roadmap to End 90% Dependence on China: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर की रीढ़ माने जाते हैं। मौजूदा समय में भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा चीन से आयात करता है, जो किसी भी भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में बड़ा जोखिम बन सकता है। सरकार ने 2025-26 के दौरान इस निर्भरता को कम करने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया है। अब फोकस घरेलू स्तर पर इन खनिजों की खोज, खनन और उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने पर है, ताकि भविष्य में सप्लाई चेन बाधित न हो।

16,300 करोड़ का मिशन, पीएलआई स्कीम से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
सरकार ने इस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय समर्थन भी दिया है। जनवरी 2025 में शुरू किए गए नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत कुल 16,300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत लगभग 1,200 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स और प्रोसेसिंग सुविधाओं पर काम चल रहा है। इसके साथ ही नवंबर 2025 में रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,350 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम लॉन्च की गई थी। इस योजना के जरिए देश में ही 6,000 एमटीपीए (MTPA) की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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माइनिंग कानूनों में सुधार, निजी निवेश के लिए रास्ते साफ
नीतिगत स्तर पर भी सरकार ने बड़े सुधार किए हैं। एमएमडीआर (MMDR) एक्ट में संशोधन कर रेयर अर्थ एलिमेंट्स को पार्ट-डी में शामिल किया गया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी मिली है। अब तक 20 से अधिक रेयर अर्थ ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इसके अलावा मोनाजाइट को एटॉमिक मिनरल्स की सूची से बाहर कर दिया गया है, जिससे परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी। सितंबर 2025 में क्रिटिकल मिनरल प्रोजेक्ट्स को जन सुनवाई से छूट देने का फैसला भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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रणनीतिक सुरक्षा के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होंगे कॉरिडोर
नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत का मानना है कि रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर भारत की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। इससे न केवल चीन पर निर्भरता घटेगी, बल्कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर सकेगा।

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