एएनआरएफ के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में देशभर के शोधकर्ताओं ने साझा किए शोध और नवाचार, 77 पोस्टर प्रस्तुतियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के शोध पर हुआ मंथन
रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने अनुसंधान की दृश्यता बढ़ाने, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग को मजबूत करने और शोध को सामाजिक प्रभाव से जोड़ने के उद्देश्य से एएनआरएफ एवं आईआईटी रुड़की अनुसंधान एवं प्रभाव सम्मेलन 2026 का आयोजन किया। अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शोधकर्ताओं, एएनआरएफ अनुदान प्राप्तकर्ताओं, संकाय सदस्यों और युवा शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
सम्मेलन में 50 से अधिक त्वरित शोध प्रस्तुतियों और 77 पोस्टर प्रस्तुतियों समेत 127 से अधिक शोध कार्य प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम में मूलभूत विज्ञान से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य, जलवायु, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और पर्यावरणीय स्थिरता तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर शोध कार्य सामने आए।
उद्घाटन समारोह में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, प्रो. पोननुरंगम कुमारगुरु, संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और शोधकर्ता मौजूद रहे। सम्मेलन का उद्देश्य केवल शोध कार्यों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि शोधकर्ताओं के बीच संवाद स्थापित करना और नए सहयोग की संभावनाओं को तलाशना भी रहा।
आईआईटी रुड़की की ओर से कहा गया कि उत्कृष्ट अनुसंधान का महत्व केवल उसके किए जाने तक सीमित नहीं है। शोध के निष्कर्षों को प्रभावी तरीके से समाज और अन्य शोधकर्ताओं तक पहुंचाना तथा उन्हें व्यावहारिक प्रभाव में बदलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत सम्मेलन में विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाया गया।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण एएनआरएफ अनुदान प्राप्तकर्ता मिलन रहा, जिसमें 50 से अधिक संक्षिप्त शोध प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों में मूलभूत विज्ञान, उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, जलवायु एवं जल विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषय शामिल रहे।
प्रस्तुत शोध कार्यों में क्वांटम सामग्री, अतिचालकता, सतत उत्प्रेरण, दवा वितरण, अल्जाइमर रोग, स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी, मीथेन उत्सर्जन, नदी प्रणालियों में एंटीबायोटिक प्रदूषण, पेरोव्स्काइट सौर सेल, लिथियम पुनर्प्राप्ति, सतत बुनियादी ढांचे, इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी के वायरलेस संचार से जुड़े शोध विशेष रूप से शामिल रहे।
शोध को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर
सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें शोध को अलग-अलग प्रारूपों और भाषाओं में व्यापक स्तर पर प्रसारित करने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को आम लोगों के लिए अधिक सरल और सुलभ बनाने में तकनीक की भूमिका पर चर्चा हुई।
आईआईटी रुड़की के अनुसार संस्थान शोधकर्ताओं को पारंपरिक अकादमिक प्रकाशनों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर अपने शोध, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसमें यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
संस्थान का मानना है कि शोध की पहुंच केवल अकादमिक समुदाय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल भाषा और प्रभावी माध्यमों से समाज तक पहुंचाया जाए तो इससे शोध का वास्तविक प्रभाव और उपयोगिता बढ़ सकती है।
भविष्य की शोध प्राथमिकताओं पर एएनआरएफ के साथ चर्चा
सम्मेलन में ‘भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान : चुनौतियां और संभावित समाधान’ विषय पर एएनआरएफ के साथ खुली चर्चा भी हुई। इसमें संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं को उभरते हुए शोध क्षेत्रों, अनुसंधान के सामने मौजूद चुनौतियों और देश के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की संभावनाओं पर एएनआरएफ प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला।
इस चर्चा के दौरान शोधकर्ताओं ने भविष्य की प्राथमिकताओं और अनुसंधान के लिए आवश्यक सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। इसका उद्देश्य देश में अनुसंधान को अधिक प्रभावी, उपयोगी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में संभावनाओं को तलाशना रहा।
77 पोस्टरों में दिखी शोध की विविधता
कार्यक्रम के समापन चरण में पीएचडी विद्यार्थियों के पोस्टर भ्रमण एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें कुल 77 पोस्टर प्रदर्शित किए गए। विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं ने शोधार्थियों के पोस्टर देखे और उनके साथ संवाद किया।
पोस्टर प्रस्तुतियों में वास्तुकला, रासायनिक एवं सिविल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, यांत्रिक इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान, जैव विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, फोटोनिक्स, भौतिकी, पृथ्वी विज्ञान, जल विज्ञान और जल संसाधन जैसे विषय शामिल रहे।
एक ही दिन में 50 से अधिक त्वरित प्रस्तुतियों और 77 पोस्टरों के माध्यम से 127 से अधिक शोध कार्यों को प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन में शोधकर्ताओं को अपने काम को संक्षिप्त और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में हो रहे शोध को समझने का अवसर भी मिला।
आईआईटी रुड़की के अनुसार सम्मेलन ने शोध उत्कृष्टता को दृश्यता, सहयोग और सामाजिक प्रभाव से जोड़ने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। आयोजन ने अनुभवी शोधकर्ताओं के साथ युवा वैज्ञानिकों और पीएचडी शोधार्थियों को भी अपने कार्यों को व्यापक शोध समुदाय के सामने रखने का अवसर दिया।

