Uttarakhand: बारिश का कहर…नारायणबगड़ बाजार में मलबे ने मचाई तबाही, 12 दुकानें और कई वाहन दबे, हाईवे रहा बाधित

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चमोली। जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में गुरुवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। कोलूसैंण के जंगल से आए मलबे, बोल्डरों और तेज पानी के बहाव ने नारायणबगड़ बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में 12 से अधिक वाहन, 12 दुकानें और कई आवासीय परिसर प्रभावित हुए, जबकि चार परिवारों को भी नुकसान पहुंचा। पूरी रात लोग दहशत में रहे और शुक्रवार सुबह बारिश थमने के बाद अपने घरों और दुकानों से मलबा हटाने में जुट गए।

बारिश के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नाले से भारी मात्रा में मलबा बाजार की ओर आ गया, जिससे सबसे अधिक नुकसान हुआ। हाईवे किनारे खड़े 12 से अधिक दोपहिया और चौपहिया वाहन मलबे में दब गए। बाजार की दुकानों और घरों के आंगन में भी मलबा भर गया, जिससे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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तेज बहाव का असर सरकारी संस्थानों पर भी पड़ा। मलबा अलकनंदा वन प्रभाग के पुराने भवन और राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) के अतिरिक्त कक्षा कक्षों तक पहुंच गया। विद्यालय परिसर में पानी और मलबा भरने से प्रथम तल के कक्ष और कार्यालय भी जलमग्न हो गए।

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अतिवृष्टि के कारण सिमली-ग्वालदम-अल्मोड़ा हाईवे गुरुवार रात बंद हो गया। हालांकि शुक्रवार तड़के बीआरओ की टीम ने मलबा हटाकर मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया, लेकिन बाजार क्षेत्र में करीब 200 मीटर तक फैले मलबे के कारण सुबह से दोपहर तक लंबा जाम लगा रहा और सैकड़ों वाहन फंसे रहे। बाद में बीआरओ ने लगातार अभियान चलाकर सड़क को पूरी तरह सुचारु किया।

बारिश से नारायणबगड़ की पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। सूचना मिलते ही एसडीएम यशवीर सिंह मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने राजस्व विभाग को नुकसान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लोगों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

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फिलहाल प्रशासन क्षति का आकलन करने में जुटा है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सफाई कार्य जारी है। मानसून की शुरुआत से पहले हुई इस घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, जल निकासी व्यवस्था और स्थायी सुरक्षा उपायों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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