देहरादून/हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए इसे उसकी मानसिकता से जोड़ दिया है। रावत ने कहा कि खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण किया जाना भाजपा की ‘अशुद्ध मानसिकता’ का प्रतीक है और ऐसी मानसिकता का ही शुद्धिकरण किए जाने की जरूरत है।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी बयान में कहा कि जिस तरह से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल पर शुद्धिकरण की बात सामने आई है, वह बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुद्धिकरण करने वाले लोगों का सीधा संबंध भाजपा और आरएसएस से है। रावत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश और केंद्र सरकार की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है।
‘सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली’
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद इस तरह का शुद्धिकरण किया जाता है तो प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी क्या है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक, शुद्धिकरण की कार्रवाई संविधान की भावना का अपमान करने के साथ ही कानून के उल्लंघन का मामला भी है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। ऐसे में किसी राजनीतिक दल या उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद स्थल को ‘शुद्ध’ करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी चिंताजनक संकेत है।
‘खरगे के साथ ऐसा तो आम आदमी का क्या?’
हरीश रावत ने इस मुद्दे को आम आदमी के सम्मान से भी जोड़ते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ इस तरह की घटना हो सकती है तो गांवों में रहने वाले सामान्य व्यक्ति को किस तरह के अपमान का सामना करना पड़ता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मामला केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह सवाल सामाजिक सम्मान, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। रावत ने कहा कि समाज में किसी व्यक्ति के साथ उसकी पहचान या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव की मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कार्रवाई नहीं हुई तो उठते रहेंगे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने संविधान या कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
रावत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मामले को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है। पार्टी इस कथित शुद्धिकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या पार्टी के सम्मान की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है।
हल्द्वानी में रैली के बाद बयानबाजी तेज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण के मामले ने प्रदेश की राजनीति में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों के अपमान से जोड़ रही है, वहीं हरीश रावत के बयान के बाद भाजपा-कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
