Uttarakhand: नैनीताल झील से शिप्रा नदी और गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड तक, NGT में गूंजे पर्यावरण के गंभीर सवाल

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हल्द्वानी। कुमाऊं में पर्यावरण से जुड़े कई अहम मुद्दे अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की चौखट तक पहुंच चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया की ओर से उठाए गए पर्यावरण संबंधी मामलों में उपलब्ध NGT रिकॉर्ड के अनुसार तीन शिकायतें बाकायदा Original Application (OA) के रूप में दर्ज होकर न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रही हैं। वहीं, हल्द्वानी शहर के ट्रांसपोर्ट कारोबार/कॉरिडोर को ट्रांसपोर्ट नगर स्थानांतरित करने से जुड़ी चौथी शिकायत भी NGT के समक्ष भेजे जाने और उस पर कार्रवाई एवं पत्राचार होने की जानकारी सामने आई है।

इन मामलों में नैनीताल झील के प्रदूषण, गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे के निस्तारण, भवाली-कैंचीधाम क्षेत्र की शिप्रा नदी में प्रदूषण जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं। हालांकि चौथी शिकायत के संबंध में उपलब्ध सार्वजनिक NGT रिकॉर्ड में अलग Original Application नंबर की पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए उसे लंबित OA के रूप में पेश करने के बजाय NGT में भेजी गई शिकायत के तौर पर देखना अधिक तथ्यात्मक होगा।

नैनीताल झील प्रदूषण का मामला OA 1335/2024

नैनीताल झील में बढ़ते प्रदूषण और गंदे पानी की समस्या को लेकर दायर शिकायत NGT में Original Application No. 1335/2024 के रूप में दर्ज हुई। मामले में संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट एवं हलफनामे मांगे गए। कुमाऊं आयुक्त, जिलाधिकारी नैनीताल और पर्यावरण विभाग समेत संबंधित अधिकारियों की ओर से दस्तावेज NGT के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

यह मामला NGT की Final Hearing की Cause List में भी शामिल रहा। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 25 मार्च 2026 की Cause List में मामले की सुनवाई 29 अप्रैल 2026 के लिए निर्धारित थी और 29 अप्रैल को भी यह मामला Final Hearing Cause List में दर्ज रहा।

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हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर 29 अप्रैल 2026 के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय की प्रमाणित प्रति सामने नहीं आती है। ऐसे में इसे अंतिम रूप से निस्तारित मामला बताने के बजाय उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति बताना अधिक उचित होगा।

गोलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड पर NGT की नजर, OA 1319/2024 में बनी Joint Committee

हल्द्वानी के गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे के कथित अवैज्ञानिक निस्तारण, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान से जुड़ी शिकायत भी NGT पहुंची। इस मामले को Original Application No. 1319/2024 के रूप में दर्ज किया गया।

NGT के 29 नवंबर 2024 के आदेश के अनुसार हेमंत सिंह गोनिया एवं अन्य की 13 सितंबर 2024 की पत्र याचिका को NGT Act की धाराओं 14 और 15 के तहत Original Application के रूप में पंजीकृत किया गया।

इसके बाद मामले में जिलाधिकारी नैनीताल, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की Joint Committee गठित की गई। समिति की रिपोर्ट 6 मार्च 2025 को NGT में दाखिल होने की जानकारी रिकॉर्ड में है। इसके बाद संबंधित विभागों से जवाब और रिपोर्ट मांगी गई।

मामले की सुनवाई 2026 में भी जारी रही। 7 जनवरी 2026 और 11 मार्च 2026 की Cause Lists में इसे Final Hearing के लिए सूचीबद्ध किया गया। वहीं, 27 मई 2026 को NGT की वेबसाइट पर जिलाधिकारी नैनीताल और नगर निगम हल्द्वानी की अलग-अलग Status Reports अपलोड किए जाने की जानकारी भी सामने आती है।

इससे साफ है कि गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड से जुड़ा मामला प्रशासनिक जवाबदेही और पर्यावरणीय अनुपालन के स्तर पर NGT के रिकॉर्ड में लगातार सक्रिय रहा है।

शिप्रा नदी प्रदूषण का मामला भी NGT में

भवाली-कैंचीधाम क्षेत्र से गुजरने वाली शिप्रा नदी में प्रदूषण का मुद्दा भी NGT तक पहुंचा है। हेमंत सिंह गोनिया एवं अन्य की 3 मार्च 2024 की पत्र याचिका को बाद में Original Application No. 290/2025 के रूप में दर्ज किया गया।

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मामले में शिप्रा नदी में ठोस कचरे, सीवर तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक अपशिष्ट से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया। NGT ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों की Joint Committee के माध्यम से स्थिति की जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया शुरू कराई।

9 जुलाई 2025 को मामले में Joint Committee की कार्रवाई शुरू हुई, जबकि 29 अगस्त 2025 को समिति की रिपोर्ट NGT के समक्ष रखी गई। Tribunal ने रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण विरोधाभास और कमियां पाईं। इसके बाद Solid Waste Management, सीवेज प्रबंधन, Environmental Compensation और आवश्यकता पड़ने पर prosecution जैसे पहलुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

मामले में आगे 27 जनवरी 2026 को District Development Authority Nainital, Chief Development Officer Nainital और Gram Panchayat Kainchi Dham को भी पक्षकार बनाया गया। उनसे निर्माण, अतिक्रमण, कूड़ा, सीवर और औद्योगिक/व्यावसायिक effluent से संबंधित जानकारी मांगी गई। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की गई थी। इसके अलावा 13 मार्च 2026 को NGT की वेबसाइट पर मामले से संबंधित तीन Response Affidavits भी अपलोड किए गए। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिप्रा नदी से संबंधित यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित रहा है।

चौथी शिकायत भी NGT तक पहुंची, लेकिन OA नंबर की पुष्टि नहीं

इन तीन मामलों के अलावा हल्द्वानी शहर के भीतर चल रहे ट्रांसपोर्ट कारोबार/कॉरिडोर को ट्रांसपोर्ट नगर स्थानांतरित करने से संबंधित एक अन्य शिकायत भी NGT के समक्ष भेजे जाने की जानकारी है। इसे हेमंत सिंह गोनिया की मूल पर्यावरणीय शिकायतों में चौथे मुद्दे के तौर पर शामिल किया गया था।

NGT की ओर से प्राप्त पत्राचार में शिकायत पर कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया का उल्लेख होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक NGT रिकॉर्ड में इस शिकायत के लिए अलग Original Application नंबर की प्रमाणित पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस मामले को फिलहाल NGT में OA के रूप में दर्ज मुकदमा बताने के बजाय NGT को भेजी गई शिकायत, जिस पर कार्रवाई/पत्राचार हुआ है, कहना अधिक उचित होगा।

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चार मुद्दे, एक बड़ा पर्यावरणीय सवाल

हेमंत सिंह गोनिया की ओर से उठाए गए इन मुद्दों का दायरा नैनीताल से हल्द्वानी और भवाली-कैंचीधाम तक फैला हुआ है। इनमें नैनीताल झील का प्रदूषण, शिप्रा नदी और कैंचीधाम क्षेत्र में प्रदूषण, गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा एवं पर्यावरणीय समस्या, और हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट कारोबार को ट्रांसपोर्ट नगर स्थानांतरित करने का मुद्दा शामिल हैं।

इनमें से तीन मामलों का NGT में Original Application के रूप में दर्ज होना यह दर्शाता है कि शिकायतें महज विभागीय पत्राचार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि संबंधित मामलों में Tribunal के स्तर पर रिपोर्ट, जवाब, हलफनामे और Joint Committee की कार्रवाई तक हुई है।

तारीखें बताती हैं कैसे आगे बढ़े मामले

गोलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड से जुड़ा मामला OA 1319/2024 के रूप में 29 नवंबर 2024 के आदेश के बाद न्यायिक प्रक्रिया में आया। शिप्रा नदी से जुड़ी मूल पत्र याचिका 3 मार्च 2024 की थी, जिसे बाद में OA 290/2025 के रूप में दर्ज किया गया। वहीं नैनीताल झील से जुड़ा मामला OA 1335/2024 के रूप में NGT के समक्ष पहुंचा।

2025 में शिप्रा मामले में Joint Committee की कार्रवाई और रिपोर्ट का दौर चला, जबकि 2026 में गोलापार और नैनीताल झील से जुड़े मामलों की सुनवाई Final Hearing Cause Lists में दिखाई दी। शिप्रा मामले में भी 2026 में नए पक्षकार जोड़े गए और संबंधित विभागों से जवाब मांगे गए।

पर्यावरणीय मुद्दों पर बढ़ी जवाबदेही

इन मामलों से एक बात स्पष्ट होती है कि कुमाऊं क्षेत्र में झील, नदी, कचरा प्रबंधन और शहरी पर्यावरण से जुड़े मुद्दे अब केवल स्थानीय स्तर की शिकायतों तक सीमित नहीं हैं। NGT में मामलों की सुनवाई और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगे जाने के चलते प्रशासनिक एवं पर्यावरणीय जवाबदेही का दायरा भी बढ़ा है।

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