12 अगस्त को लगेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा…सूतक भी मान्य नहीं

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हल्द्वानी। बुधवार 12 अगस्त 2026 को अमावस्या के दिन वर्ष का पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां ग्रहण का सूतक भी मान्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि भारत सहित एशिया महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण दृश्य नहीं रहेगा।

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार, भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर मध्यरात्रि 12 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ग्रहण के दौरान सूर्य पूरी तरह चंद्रमा की छाया से ढक जाएगा, इसलिए इसे खग्रास यानी पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जा रहा है।

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अमेरिका, यूरोप और दक्षिण अफ्रीका में दिखाई देगा ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण भारत और एशिया में दिखाई नहीं देगा। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिमी अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। यूरोप के कई देशों में भी ग्रहण की दृश्यता रहने की बात कही गई है।

चूंकि भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां धार्मिक दृष्टि से सूतक आदि दोष लागू नहीं होंगे। आमजन को ग्रहण को लेकर अनावश्यक भ्रम या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

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ग्रहण के समय बनेगा चतुर्ग्रही योग

ग्रहण के समय कर्क राशि में चतुर्ग्रही योग बनेगा। इसमें सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु की युति रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यूरोपीय देशों पर इसका मिला-जुला प्रभाव देखने को मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि राहु और केतु के द्वितीय एवं अष्टम भाव में होने के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ देशों में तनाव और अस्थिरता की स्थिति बढ़ने की आशंका मानी जा रही है। यूरोपीय देशों में आर्थिक नुकसान, प्राकृतिक आपदाओं और जनहानि जैसी परिस्थितियों के संकेत भी ज्योतिषीय गणना में बताए गए हैं।

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भारत में नहीं रहेगा ग्रहण का धार्मिक प्रभाव

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा और सूतक भी नहीं लगेगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण के कारण पूजा-पाठ, भोजन या अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर विशेष प्रतिबंध मानने की आवश्यकता नहीं होगी।

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