मध्य पूर्व में बढ़ी हलचल: ईरान-अमेरिका वार्ता के संकेत…ट्रंप का दावा, लेबनान में हमलों से तनाव तेज

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब बातचीत की संभावनाएं दिखाई देने लगी हैं। वहीं दूसरी ओर लेबनान में जारी सैन्य हमलों ने क्षेत्रीय संकट को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान कमजोर स्थिति में है और उसने अमेरिका से अपने बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाने की मांग की है। हालांकि उन्होंने इस दावे से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की। इसके बावजूद उनके बयान को कूटनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर मतभेद हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि वहां अंतिम निर्णय कौन ले रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता के लिए मजबूर करना चाहता है।

इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने हाल ही में प्रस्ताव दिया है कि पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए और बाद में परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू हो। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस प्रस्ताव पर विचार कर चुकी है।

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उधर, लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्धविराम के बावजूद इज़राइल की ओर से लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं। कुछ हमले उन इलाकों से आगे भी हुए हैं, जिन्हें इज़राइल “येलो लाइन” कहता है।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक एक ताजा हमले में पांच लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन सिविल डिफेंस कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा लेबनानी सेना के दो जवान घायल बताए गए हैं।

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लेबनान के प्रधानमंत्री ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे युद्ध अपराध करार दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।

ईरान-अमेरिका तनाव और लेबनान में बढ़ते संघर्ष के कारण पूरी दुनिया की नजरें अब मध्य पूर्व पर टिक गई हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर तेल कीमतों, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

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