28 अगस्त को रक्षाबंधन का खास संयोग, भद्रा नहीं बनेगी बाधा…पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया राखी और श्रावणी उपाकर्म का शुभ समय

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हल्द्वानी। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन श्रावणी उपाकर्म भी होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, इसलिए बहनें पूरे दिन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। वहीं श्रावणी उपाकर्म के लिए पूर्णिमा तिथि का प्रातःकाल विशेष महत्वपूर्ण रहेगा।

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सूर्योदय से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदयव्यापिनी पूर्णिमा और भद्रा रहित तिथि होने के कारण रक्षाबंधन के लिए दिन शुभ माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रावणी उपाकर्म पूर्णिमा तिथि में करना श्रेयस्कर माना गया है, इसलिए इससे जुड़े धार्मिक कर्मकांड सुबह के समय ही संपन्न करना उत्तम रहेगा।

सुबह 9:48 बजे तक श्रावणी उपाकर्म का विशेष महत्व

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के दिन प्रातः स्नान आदि के बाद महासंकल्प लेकर गणेश आदि देवताओं का पंचांग कर्म किया जाता है। इसके बाद कलश में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का पूजन, रक्षा सूत्र एवं जनेऊ की विधिवत प्रतिष्ठा की जाती है।

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इसके साथ ही वेदोक्त ऋषियों और वंशोक्त ऋषियों का तर्पण किया जाता है। धार्मिक विधि पूरी होने के बाद प्रतिष्ठित जनेऊ धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रावणी उपाकर्म में विधिवत प्रतिष्ठित जनेऊ धारण और रक्षा सूत्र की प्रतिष्ठा का विशेष महत्व है।

पूरे दिन बांध सकेंगी राखी, भद्रा का नहीं रहेगा साया

रक्षाबंधन को लेकर इस बार सबसे खास बात यह है कि 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन और होली जैसे पर्वों पर भद्रा काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। भद्रा के दौरान राखी बांधना भी अशुभ माना जाता है।

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार इस बार पूर्णिमा भद्रा रहित है। इसलिए सुबह से लेकर पूरे दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। श्रावणी उपाकर्म और जनेऊ धारण जैसे धार्मिक कर्म सुबह पूर्णिमा तिथि रहते करना विशेष रूप से उत्तम रहेगा।

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हालांकि 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। ऐसे में धार्मिक शुभ कार्य करने वाले लोग अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार समय का निर्धारण कर सकते हैं।

श्रावणी उपाकर्म क्यों है खास?

सनातन परंपरा में श्रावणी उपाकर्म का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह केवल जनेऊ बदलने की परंपरा नहीं बल्कि ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, आत्मशुद्धि और वैदिक परंपराओं के स्मरण का अवसर भी माना जाता है।

इस दिन ऋषि तर्पण, पूजन और जनेऊ धारण के माध्यम से सनातन परंपरा में ज्ञान और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाता है।

श्रावणी पूर्णिमा पर संस्कृत दिवस भी

श्रावणी पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस समारोह भी मनाया जाता है। पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार संस्कृत को देवभाषा के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है और भारतीय संस्कृति, दर्शन तथा वैदिक परंपरा में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।

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उन्होंने लोगों से संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना है कि संस्कृत के माध्यम से ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ जैसी लोककल्याण की भावना को समाज में मजबूत किया जा सकता है।

चंद्र ग्रहण भी, लेकिन भारत में नहीं दिखेगा

पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण भी होगा, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में सूतक आदि का प्रभाव नहीं माना जाएगा। यह ग्रहण प्रशांत महासागर क्षेत्र के साथ अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका आदि देशों में दिखाई देगा, जबकि भारत सहित एशिया महाद्वीप में इसका दृश्य प्रभाव नहीं रहेगा।

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