नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मामूली विवाद के बाद मिठाई विक्रेता की गोली मारकर हत्या करने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने 12 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा की अदालत ने आरोपी नीरज को हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
यह सनसनीखेज घटना 18 फरवरी 2014 को बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास स्थित एक मिठाई की दुकान पर हुई थी। अभियोजन के अनुसार, नीरज जलेबी खरीदने दुकान पर पहुंचा और दुकानदार से कतार में खड़े अन्य ग्राहकों से पहले जलेबी देने की मांग की। जब दुकानदार ने नियमों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया तो दोनों के बीच कहासुनी हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर नीरज ने पहले दुकानदार को थप्पड़ मारा और फिर पिस्तौल निकालकर बेहद नजदीक से उसके सिर में गोली मार दी। गोली लगने से विक्रेता गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटनास्थल के पास ही दबोचा गया आरोपी
वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी नीरज को घटनास्थल के पास से ही गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से फर्जी शस्त्र लाइसेंस भी बरामद हुआ था, जिसके आधार पर उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने क्यों नहीं दी फांसी?
सजा पर सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर भी विचार किया। अदालत ने कहा कि नीरज किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल नहीं पाया गया, मुकदमे के दौरान वह लगातार न्यायिक हिरासत में रहा और उसके सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उसके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं।
इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद की सजा उपयुक्त होगी।

