लक्ष्मण मेहरा, हल्द्वानी। कुमाऊं में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में चल रहा टैक्स चोरी का खेल अब ‘माफिया राज’ में तब्दील होता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में जिम्मेदार विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिनकी कथित शह पर यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है।
सूत्रों का दावा है कि ऊधमसिंह नगर से लेकर हल्द्वानी तक फैला यह सिंडिकेट पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहा है। यदि ऊधमसिंह नगर स्तर पर ही सख्ती से कार्रवाई हो जाए, तो इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ी जा सकती है, लेकिन कथित ‘सेटिंग’ के चलते सबकुछ धड़ल्ले से चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक, रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर से लेकर हल्द्वानी ट्रांसपोर्ट नगर तक जुड़े कारोबारी हर महीने टैक्स चोरी से कमाए गए काले धन का हिस्सा कथित अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। बदले में उन्हें ‘फ्री पास’ मिल जाता है—न बॉर्डर पर चेकिंग, न कोई सख्त कार्रवाई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली से रोजाना टैक्स चोरी का माल लेकर आने वाले ट्रकों की उत्तराखंड सीमा पर लगभग कोई जांच नहीं होती। नतीजा—बिना बिल और बिना जीएसटी का माल सीधे गोदामों तक पहुंच रहा है और सरकार को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार के दावे इस मामले में खोखले नजर आ रहे हैं। कर चोरी रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग और प्रशासनिक तंत्र सबकुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है—या यूं कहें कि आंख मूंदे बैठा है।
सबसे बड़ा सवाल क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर सिस्टम के भीतर ही टैक्स चोरी का ‘सुरक्षित खेल’ चल रहा है?
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह टैक्स चोरी का नेटवर्क आने वाले समय में बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। फिलहाल, कुमाऊं में ‘टैक्स चोरी माफिया’ का यह खेल बेखौफ और बेपरवाह जारी है।
