नई दिल्ली/भारत-नेपाल सीमा। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत-नेपाल सीमा पर नियम और सख्त कर दिए गए हैं। अब भारतीय पर्यटक और निजी वाहन साल में अधिकतम 30 बार ही भंसार (सीमा शुल्क) अदा कर नेपाल में प्रवेश कर सकेंगे। इसके बाद एंट्री करने पर जुर्माना देना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत भंसार प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम के जरिए नेपाल में प्रवेश करने वाले वाहनों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा, जिससे तय सीमा से अधिक बार आने-जाने वाले वाहनों की आसानी से पहचान हो सकेगी।
बालेंद्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद सीमा पर निगरानी बढ़ाई गई है। इससे पहले भी 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार और बिना एमआरपी वाले सामान पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जा चुके हैं।
अब नए नियम के अनुसार, भंसार कराने के बाद कोई भी भारतीय वाहन साल भर में कुल 30 दिन ही नेपाल में रह सकता है—चाहे एक साथ या अलग-अलग हिस्सों में। इससे अधिक समय रुकने पर दोपहिया वाहनों पर 2000 नेपाली रुपये और चारपहिया वाहनों पर 2500 नेपाली रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगाया जाएगा।
हालांकि, माल ढोने वाले वाहनों को इस नियम से फिलहाल छूट दी गई है।
सिद्धार्थनगर के बढ़नी, खुनुवां और ककरहवा बॉर्डर तथा महराजगंज के सोनौली बॉर्डर से गुजरने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग, जो रोजमर्रा की जरूरतों या रिश्तेदारी के कारण नियमित आवाजाही करते हैं, इस नई व्यवस्था से चिंतित हैं।
नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति नेपाल की सड़कों पर वाहन चलाना गैरकानूनी है। पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ वाहन जब्त भी किया जा सकता है। वर्तमान में दोपहिया के लिए 100, तीनपहिया के लिए 400 और चारपहिया वाहनों के लिए 600 नेपाली रुपये प्रतिदिन शुल्क निर्धारित है।
भंसार अधीक्षक मयंक कुमार कर्ण के अनुसार, हाल के दिनों में बिना अनुमति भारतीय वाहनों की आवाजाही बढ़ने से टैक्स चोरी और सुरक्षा से जुड़े खतरे सामने आए थे। इन्हीं को नियंत्रित करने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया गया है।

