AI पर भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी, अमेरिकी अधिकारी बोलीं-खुलेपन और भरोसे पर टिकी हो तकनीकी ताकत

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नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकों को लेकर सहयोग तेजी से मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी बेथानी मॉरिसन ने कहा है कि AI जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए दोनों देशों को खुलेपन के सिद्धांतों पर आगे बढ़ना होगा और विरोधी देशों पर तकनीकी निर्भरता से बचना जरूरी है।

यूएस-इंडिया एआई एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को विश्वस्तरीय तकनीक तक पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि उसका उपयोग समाज के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने में किया जा सके।

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उन्होंने कहा कि AI में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके फायदे तभी पूरी तरह मिल सकते हैं जब तकनीकी ढांचा सुरक्षित, खुला और भरोसेमंद हो। साथ ही तकनीकी साझेदारी में सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सप्लाई चेन को प्राथमिकता देना जरूरी है।

मॉरिसन ने AI सेक्टर में तेजी से हो रहे निवेश का जिक्र करते हुए बताया कि 2026 की पहली तिमाही में निजी क्षेत्र ने 300 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें आधे से ज्यादा हिस्सा अमेरिकी कंपनियों का है।

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उन्होंने भारतीय कंपनियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत तेजी से AI और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। हाल ही में आयोजित सेलेक्टयूएसए इन्वेस्टमेंट समिट में भारतीय कंपनियों द्वारा 1.1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को दर्शाती है।

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अमेरिकी अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत सरकार AI के उपयोग को विकास और समृद्धि के लिए अहम मानती है, साथ ही इससे जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर भी सतर्क है।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका तकनीकी नवाचार के अगले दौर में मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहे हैं और आने वाले समय में दोनों देश मिलकर AI के भविष्य को दिशा देंगे।

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