
काराकास। वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के 30 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। आधिकारिक तौर पर अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी ढही हुई इमारतों के मलबे में फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया है। राजधानी काराकास और उसके निकट स्थित तटीय क्षेत्र ला गुआइरा सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसी क्षेत्र में स्थित देश का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद कर दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राहत सामग्री और बचाव दलों के पहुंचने में कठिनाइयां आ रही हैं।

राहतकर्मी लगातार मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश में जुटे हैं। कई स्थानों से बच्चों और बुजुर्गों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया है। सामने आई तस्वीरों में खून से लथपथ लोग, तबाह इमारतें और मलबे में फंसे पालतू पशु इस आपदा की भयावहता को बयां कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, हताहतों की वास्तविक संख्या हजारों में हो सकती है क्योंकि कई इमारतों तक अभी भी राहत दल नहीं पहुंच सके हैं।

भूकंप के झटके पड़ोसी देशों तक महसूस किए गए। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी एहतियात के तौर पर कई इमारतें खाली कराई गई हैं। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं और लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

इस बीच भारत, अमेरिका, फ्रांस सहित कई देशों ने वेनेजुएला को हरसंभव सहायता देने की पेशकश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया, जबकि ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने पुरी समुद्र तट पर सैंड आर्ट बनाकर भूकंप पीड़ितों को श्रद्धांजलि और समर्थन व्यक्त किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूकंप वेनेजुएला के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में शामिल हो सकता है। इससे पहले वर्ष 1999 में आए भीषण भूस्खलन ने भी देश में भारी तबाही मचाई थी। मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और सीमित संसाधनों के बीच राहत अभियान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

