54 साल बाद चांद की ओर इंसान की वापसी: आर्टेमिस-II की सफल उड़ान, 4 अंतरिक्ष यात्री 4 लाख किमी दूर तक जाएंगे

खबर शेयर करें

वॉशिंगटन/फ्लोरिडा। करीब 54 साल बाद इंसान ने एक बार फिर चांद की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का पहला मानव मिशन Artemis II भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया।

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री Christina Koch, Victor Glover, Reid Wiseman और Jeremy Hansen सवार हैं। इन्हें शक्तिशाली Space Launch System (SLS) रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है।

यह मिशन करीब 10 दिनों की यात्रा पर है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक जाएंगे जो अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें 👉  बजट 2026: सरकार का ऐलान...टैक्सपेयर्स को अपराधी नहीं, साझेदार की तरह देखा जाएगा

आर्टेमिस-II के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब पहुंचेंगे, उसकी परिक्रमा करेंगे, लेकिन उतरेंगे नहीं। यह एक टेस्ट मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य में चांद पर मानव मिशनों के लिए जरूरी तकनीक, सिस्टम और सुरक्षा मानकों की जांच करना है।

यह मिशन सिर्फ चांद तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि डीप स्पेस में मानव शरीर की पहली वास्तविक परीक्षा भी है। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से बाहर जाकर कॉस्मिक रेडिएशन और अंतरिक्षीय परिस्थितियों का सामना करेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में होने वाले हर बदलाव को रिकॉर्ड किया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिली 54 नियमित फैकल्टी, शिक्षण व इलाज व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

मिशन की सबसे खास वैज्ञानिक उपलब्धि “ऑर्गन-ऑन-ए-चिप” तकनीक है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त से विकसित कोशिकाओं को माइक्रोचिप पर तैयार किया गया है एक सेट अंतरिक्ष में जाएगा, जबकि दूसरा पृथ्वी पर रहेगा। मिशन के बाद दोनों की तुलना कर यह पता लगाया जाएगा कि डीएनए डैमेज, टेलोमियर लंबाई और अन्य जैविक बदलावों पर डीप स्पेस का क्या असर पड़ता है।

नासा के अनुसार यह प्रयोग भविष्य में बेहद अहम साबित होगा, क्योंकि इससे अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ने वाले जोखिमों का पहले से आकलन किया जा सकेगा। यानी मंगल जैसे लंबे मिशनों के लिए यह डेटा निर्णायक भूमिका निभाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  अवैध संबंधों की खूनी साजिश: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की पति की निर्मम हत्या

गौरतलब है कि इस मिशन की लॉन्चिंग कई बार टली थी। पहले इसे फरवरी 2026 में लॉन्च किया जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों और परीक्षणों के चलते तारीख आगे बढ़ती रही। मार्च में भी लॉन्च विंडो तय हुई, लेकिन उड़ान संभव नहीं हो सकी। आखिरकार अब अप्रैल 2026 में यह ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया।

NASA ने इस मिशन को चांद और आगे मंगल ग्रह पर मानव बसाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्टेमिस-II भविष्य के उन अभियानों की नींव रखेगा, जिनमें इंसान लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहकर काम करेगा।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page