शिमला। हिमाचल Pradesh के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन नगर निगमों में बहुमत हासिल कर लिया है। मंडी, धर्मशाला और सोलन नगर निगम में भाजपा ने जीत का परचम लहराया, जबकि पालमपुर नगर निगम कांग्रेस के खाते में गया। चुनाव परिणामों को प्रदेश की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इन्हें आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था।
राज्य की चार नगर निगमों के कुल 63 वार्डों में हुए चुनाव में भाजपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। कांग्रेस को मिली 23 सीटों में से 11 सीटें अकेले पालमपुर नगर निगम से आई हैं।
भाजपा की सबसे बड़ी सफलता मंडी नगर निगम में देखने को मिली, जहां 14 में से 12 वार्डों में पार्टी उम्मीदवार विजयी रहे। कांग्रेस यहां केवल एक सीट जीत सकी, जबकि एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। धर्मशाला नगर निगम में भी भाजपा ने 17 में से 11 सीटों पर कब्जा जमाकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
सोलन नगर निगम में भाजपा ने 17 में से 10 वार्ड जीतकर नगर निगम पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। कांग्रेस को यहां छह सीटों पर सफलता मिली, जबकि एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी ने जीती। दूसरी ओर पालमपुर नगर निगम कांग्रेस के लिए राहत लेकर आया। यहां कांग्रेस ने 15 में से 11 सीटों पर जीत दर्ज कर नगर निगम पर कब्जा जमाया, जबकि भाजपा केवल चार सीटों तक सीमित रही।
चुनाव परिणामों के बाद भाजपा ने इसे विकास, सुशासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास की जीत बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश की जनता ने भाजपा की विकासोन्मुखी नीतियों पर भरोसा जताया है। भाजपा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद का परिणाम बताया।
वहीं कांग्रेस के लिए यह परिणाम मिश्रित रहे हैं। पालमपुर में मिली जीत ने पार्टी को राहत जरूर दी है, लेकिन अन्य तीन नगर निगमों में हार ने संगठन और रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नतीजों के बाद कांग्रेस को अपने संगठनात्मक ढांचे और जनसंपर्क अभियान की समीक्षा करनी होगी।
गौरतलब है कि 17 मई को हुए मतदान में 69.16 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव नतीजों ने भाजपा को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है, जबकि कांग्रेस के सामने आगामी चुनावों से पहले अपनी रणनीति को मजबूत करने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब इन परिणामों को हिमाचल प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।

