Haldwani: निजी स्कूलों पर प्रशासन का बड़ा शिकंजा…39 और स्कूलों को नोटिस, अब तक 89 संस्थान रडार पर

खबर शेयर करें

हल्द्वानी। नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने और नियमों की अनदेखी करने वाले 39 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इससे पहले जिले के 50 स्कूलों को नोटिस भेजे जा चुके थे। अब तक कुल 89 निजी स्कूल प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं।

यह कार्रवाई जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देशों पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल द्वारा की गई है। विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों और जांच रिपोर्टों के आधार पर स्कूलों के खिलाफ यह सख्त कदम उठाया गया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड STF का बड़ा खुलासा, नकली दवाओं के गिरोह का भंडाफोड़, सरगना समेत छह गिरफ्तार

नोटिस पाने वाले स्कूलों में हल्द्वानी, रामनगर, लालकुआं, भीमताल, भवाली और बेतालघाट क्षेत्र के कई निजी विद्यालय शामिल हैं। प्रशासन की जांच में सामने आया कि कई स्कूलों ने एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर रखी थीं, जिससे अभिभावकों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।

यह भी पढ़ें 👉  ‘निरोगी तन, निर्मल मन और जागृत आत्मा’ के संदेश के साथ मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

इसके अलावा कुछ विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही किताबें और अन्य सामग्री खरीदने का अप्रत्यक्ष दबाव बनाए जाने की शिकायतें भी मिलीं। कई स्कूलों की वेबसाइट पर फीस संरचना और पुस्तक सूची जैसी अनिवार्य जानकारी भी सार्वजनिक नहीं पाई गई।

प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने, तय दुकानों की बाध्यता खत्म करने, वेबसाइट पर शुल्क और पुस्तक सूची सार्वजनिक करने तथा अतिरिक्त वसूली गई रकम का समायोजन या धनवापसी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यह भी पढ़ें 👉  वेनेजुएला में भूकंप से भीषण तबाही: मृतकों का आंकड़ा 920 पार, मलबे में अपनों को तलाश रहे लोग, दुनिया भर से पहुंच रही मदद..तस्वीरें

जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां भी गठित कर दी गई हैं, जो निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page