हल्द्वानी। महिला चिकित्सालय हल्द्वानी में निर्माणाधीन 50 बेड की मातृ एवं शिशु कल्याण यूनिट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टविस्ट हेमंत सिंह गौनिया ने परियोजना में आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाते हुए उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय तथा राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को विस्तृत शिकायत एवं जनहित प्रार्थना पत्र भेजा है।
गौनिया का आरोप है कि लगभग 13.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन इस यूनिट में पुराने अस्पताल भवन और नए भवन के बीच कनेक्टिंग ब्रिज की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके अलावा पार्किंग, सुरक्षित आवागमन मार्ग और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे भविष्य में मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि महिला चिकित्सालय हल्द्वानी पूरे कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं, प्रसूताएं और नवजात शिशु उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) भी संचालित है। ऐसे में दोनों भवनों के बीच सुरक्षित संपर्क मार्ग न होने से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को एक भवन से दूसरे भवन तक पहुंचाने में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
आरटीआई एक्टविस्ट ने इस मामले को सीधे तौर पर माताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय बताते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का भी उल्लेख किया है। उन्होंने मांग की है कि परियोजना में आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
अपने प्रार्थना पत्र में उन्होंने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि मामले को जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में स्वीकार कर संबंधित विभागों, कार्यदायी संस्था और शासन से जवाब तलब किया जाए। साथ ही परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराते हुए कनेक्टिंग ब्रिज, सुरक्षित संपर्क मार्ग और पार्किंग जैसी सुविधाओं के लिए आवश्यक बजट स्वीकृत करने के निर्देश दिए जाएं।
वहीं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भेजे गए पत्र में उन्होंने कनेक्टिंग ब्रिज निर्माण के लिए विशेष बजट स्वीकृत करने, परियोजना की समीक्षा कराने तथा संभावित लापरवाही की जांच करवाने की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार शिकायतें रजिस्ट्री डाक के माध्यम से भेजी गई हैं तथा संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के जरिए भी प्रेषित की गई हैं।
हेमंत सिंह गौनिया ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस गंभीर विषय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
“माताओं और नवजातों की सुरक्षा से समझौता नहीं”
गौनिया ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली स्वास्थ्य परियोजनाओं में यदि मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहेगा तो उसका सीधा खामियाजा आम जनता, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि माताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और जनहित में इस विषय पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।

