उत्तराखंड: पर्वतीय जिलों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सौगात, NHM के तहत 3.50 लाख तक मानदेय पर तैनाती

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। “यू कोट वी पे” मॉडल के अंतर्गत चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिलों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

एनएचएम के तहत 03 दिसंबर 2025 को आयोजित साक्षात्कार के बाद एनेस्थेटिस्ट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और उप जिला चिकित्सालयों (एसडीएच) में तैनात किया गया है। इन नियुक्तियों से प्रसव सेवाओं, सर्जरी, नवजात शिशु उपचार और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया सीएचसी में एनेस्थेटिस्ट डॉ. आर. हेमचंद्रन, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. देविका खत्री और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनंत गुप्ता की तैनाती की गई है। चमोली जिले के गैरसैंण एसडीएच में एनेस्थेटिस्ट डॉ. विशाल प्रताप सिंह और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा भानुदास मुरकुटे को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल सीएचसी में डॉ. ममता थपलियाल तथा पिथौरागढ़ के डीडीहाट सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. किशन सिंह महर सेवाएं देंगे।

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सभी डॉक्टरों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से 11 माह की संविदा अवधि के लिए की गई है, जिसे कार्य निष्पादन के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। चयनित चिकित्सकों को निर्धारित समय में संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करना होगा।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को उनके नजदीक ही विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन तैनातियों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।

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सरकार के इस निर्णय को दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जिससे आमजन को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।

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