देहरादून। उत्तराखंड में परिवार/कुटुंब रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्तर पर व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के साथ दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO/ADM स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, जिससे पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान की जा सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के तहत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को अब और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी (SDM) के पास निहित है। वर्तमान में यह सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी कारण नियमावली में आवश्यक संशोधन की जरूरत महसूस की गई है।
पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 01 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन आए, जिनमें से 2,60,337 स्वीकृत और 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन व अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित पूरे प्रदेश में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी क्षेत्र में भेदभाव न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के तहत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है। इस बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते और निदेशक पंचायती राज निधि यादव मौजूद रहे।
