जंतर-मंतर पर तीसरे दिन भी जारी रहा सीजेपी का धरना, पुलिस से हुई बहस…किसानों ने दिया समर्थन

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नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का धरना प्रदर्शन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया।

धरने के तीसरे दिन आधार कार्ड और पैन कार्ड की जांच को लेकर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके और पुलिस के बीच बहस भी देखने को मिली। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर आने वाले लोगों से आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगे जा रहे हैं, जबकि वे केवल प्रदर्शन में शामिल होने, भोजन या पानी पहुंचाने के लिए आ रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला है और लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि लोगों की निजी जानकारी क्यों ली जा रही है। उनके अनुसार आधार कार्ड के माध्यम से किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंचा जा सकता है, इसलिए यह निजता से जुड़ा गंभीर विषय है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इन आरोपों को निराधार बताया है।

इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के चढूनी गुट ने भी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन ने छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने और अपनी मांगें रखने का फैसला किया है। इससे पहले अभिजीत दीपके ने देशभर के किसानों और मजदूरों से जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील की थी।

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किसानों के समर्थन पर अभिजीत दीपके ने भारतीय किसान यूनियन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों और किसानों का एकजुट होना लोकतांत्रिक आंदोलन को मजबूती देगा। प्रदर्शनकारियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों के लिए चाय, पानी और भोजन की व्यवस्था भी की गई है। कई स्वयंसेवक व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल भाषणों तक सीमित आंदोलन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के सहयोग और समर्पण का परिणाम है।

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सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि ऐसे स्वयंसेवक आंदोलन की रीढ़ हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के लगातार सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। वहीं, अभिजीत दीपके ने कहा कि किसी भी जन आंदोलन की वास्तविक ताकत वे लोग होते हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखते हैं। उन्होंने आंदोलन की सफलता का श्रेय सामूहिक प्रयासों को दिया।

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