अमेरिका ने दी लॉन्ग-टर्म सपोर्ट सर्विसेज की मंजूरी, भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता होगी और मजबूत
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग एक नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने भारतीय सेना के बेड़े में शामिल अत्याधुनिक AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और M777A2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों के लिए सस्टेनमेंट सपोर्ट सर्विसेज और संबंधित उपकरणों की बिक्री को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस रक्षा पैकेज की कुल अनुमानित लागत करीब 482.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।
अमेरिका की Defense Security Cooperation Agency (DSCA) ने 17 जून को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि यह सौदा भारत की रक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
M777 तोपों को मिलेगा दीर्घकालिक तकनीकी समर्थन
अधिसूचना के अनुसार भारत ने अपनी M777A2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों के लिए व्यापक तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता की मांग की थी। लगभग 230 मिलियन डॉलर के इस पैकेज में स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत सेवाएं, तकनीकी सहायता, फील्ड सर्विस, प्रशिक्षण और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं शामिल हैं।
M777 तोपें विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित तैनाती और सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती हैं। भारतीय सेना ने इन्हें सीमावर्ती और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किया था।
अपाचे हेलीकॉप्टरों के रखरखाव पर 198.2 मिलियन डॉलर खर्च
अमेरिका ने भारतीय सेना के अत्याधुनिक AH-64E Apache हेलीकॉप्टरों के लिए भी एक अलग सपोर्ट पैकेज को मंजूरी दी है। करीब 198.2 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस पैकेज के तहत इंजीनियरिंग सहायता, तकनीकी सेवाएं, लॉजिस्टिक सपोर्ट, प्रशिक्षण और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अपाचे हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिने जाते हैं। इनका उपयोग दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने, सटीक हवाई हमले करने और युद्धक्षेत्र में सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए किया जाता है।
बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और BAE सिस्टम्स निभाएंगी अहम भूमिका
इस रक्षा सहयोग कार्यक्रम में Boeing और Lockheed Martin अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराएंगी। वहीं M777 तोपों के सपोर्ट कार्यक्रम का दायित्व BAE Systems को सौंपा गया है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत
अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा। साथ ही यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को भी नई मजबूती देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल उपकरणों की खरीद नहीं, बल्कि भारतीय सेना की दीर्घकालिक युद्धक क्षमता और परिचालन दक्षता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। इससे सेना के अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और उनकी युद्धक तैयारियों में निरंतरता बनी रहेगी।

