RTI में बड़ा खुलासा: देश में खाद्यान्न उत्पादन ने बनाया नया रिकॉर्ड, गेहूं-धान की पैदावार बढ़ी, कई फसलों में गिरावट भी दर्ज

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हल्द्वानी/नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी में देश के कृषि उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के कृषि उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान उपलब्ध कराए हैं। 11 पृष्ठों की इस रिपोर्ट में देशभर की प्रमुख फसलों के उत्पादन, उत्पादकता (यील्ड) और बोए गए क्षेत्रफल (एरिया) के राष्ट्रीय एवं राज्यवार आंकड़े शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 3577.32 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 3322.98 लाख टन की तुलना में लगभग 254 लाख टन अधिक है। कृषि विशेषज्ञ इसे खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

गेहूं और धान के उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में चावल (धान) का उत्पादन करीब 1497 लाख टन तथा गेहूं का उत्पादन लगभग 1175 लाख टन रहने का अनुमान है। दोनों प्रमुख खाद्यान्न फसलों के उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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मक्का और मोटे अनाज का उत्पादन भी बढ़ा

आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मक्का का उत्पादन बढ़कर करीब 380 लाख टन पहुंचने का अनुमान है। वहीं ज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाजों के उत्पादन में भी कई राज्यों में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि कुछ राज्यों में इन फसलों के उत्पादन में गिरावट भी सामने आई है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर उत्पादन में असमानता देखने को मिल रही है।

दलहन और तिलहन की तस्वीर रही मिश्रित

रिपोर्ट के मुताबिक चना, अरहर, उड़द, मूंग और मसूर जैसी दलहनी फसलों के उत्पादन में कुछ राज्यों में वृद्धि हुई है, जबकि कुछ राज्यों में उत्पादन घटा है। इसी प्रकार सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल सहित तिलहनी फसलों के उत्पादन में भी राज्यों के अनुसार अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं। इससे स्पष्ट होता है कि दलहन और तिलहन क्षेत्र में अभी भी संतुलित उत्पादन की चुनौती बनी हुई है।

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गन्ना, कपास और जूट के भी जारी हुए आंकड़े

कृषि मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ में गन्ना, कपास, जूट तथा अन्य वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन, उत्पादकता और क्षेत्रफल का भी विस्तृत राज्यवार ब्यौरा दिया गया है। इससे विभिन्न राज्यों में फसलों के प्रदर्शन का तुलनात्मक आकलन किया जा सकता है।

सभी राज्यों के आंकड़े रिपोर्ट में शामिल

रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के फसलवार आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें प्रत्येक राज्य में उत्पादन, प्रति हेक्टेयर उपज और बोए गए क्षेत्रफल का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया गया है।

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मंत्रालय ने दी यह जानकारी

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि उपलब्ध कराए गए आंकड़े 20 नवंबर 2025 तक तैयार किए गए तृतीय अग्रिम अनुमानों पर आधारित हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उत्पादन में वृद्धि या कमी के कारणों, सरकारी योजनाओं के प्रभाव या निवेश से जुड़े विश्लेषणात्मक आंकड़े कृषि सांख्यिकी अनुभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता ने क्या कहा

आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि यह जानकारी किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए बेहद उपयोगी है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी आंकड़ों में पारदर्शिता लाना और आम जनता तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि कृषि समेत अन्य जनहित के विषयों पर भी वे लगातार आरटीआई के माध्यम से सूचनाएं प्राप्त कर रहे हैं।

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