नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात शुल्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) की दरों में संशोधन किया है। नई अधिसूचना के तहत पेट्रोल निर्यात पर लगने वाला शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
पेट्रोल निर्यात पर जीरो टैक्स, डीजल और ATF महंगे
सरकार के नए फैसले के मुताबिक पेट्रोल निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की दर 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है। इससे पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर सरकार ने शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है।
ईंधन निर्यात शुल्क की नई दरें:
- पेट्रोल: 2.50 रुपये से घटाकर शून्य रुपये प्रति लीटर।
- डीजल: 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर।
- एटीएफ: 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर।
इस बदलाव से साफ है कि सरकार अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर संतुलित रणनीति अपना रही है।
आखिर सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्च के उत्तरार्ध में ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। इसका प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारतीय रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मुनाफे के लालच में घरेलू जरूरतों की अनदेखी न करें। सरकार चाहती है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से बढ़ी भारत की चिंता
भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था।
लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत को कच्चे तेल के आयात के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े हैं। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, परिवहन लागत और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता पर भी पड़ा है।
महंगे कच्चे तेल के बावजूद ईंधन निर्यात से कमाई में 50% उछाल
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी के बीच भारत के ईंधन निर्यात राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से सितंबर की अवधि में कुल निर्यात मात्रा में कमी आने के बावजूद ईंधन निर्यात से होने वाली कमाई में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी ओर, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है।
आगे क्या होगा?
सरकार के इस फैसले से पेट्रोल निर्यातकों को राहत मिलेगी, जबकि डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ा शुल्क रिफाइनरियों के निर्यात लाभ को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही सरकार को घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

