नाटो शिखर सम्मेलन से पहले रूस का कीव पर बड़ा हमला, मिसाइलों और ड्रोन से दहली यूक्रेन की राजधानी

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कीव। नाटो शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दुनिया का ध्यान एक बार फिर युद्ध की ओर खींच लिया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हमले के दौरान राजधानी में कई तेज धमाके सुनाई दिए, जबकि पूरे शहर में एयर रेड सायरन गूंजते रहे। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को तत्काल बंकरों और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

इस हमले को ऐसे समय अंजाम दिया गया है, जब नाटो देशों के शीर्ष नेता शिखर सम्मेलन के लिए एकत्र होने वाले हैं और यूक्रेन युद्ध बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि रूस ने इस हमले के जरिए पश्चिमी देशों और नाटो को कड़ा रणनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने एक साथ कई प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल किया। राजधानी की ओर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन भी भेजे गए। यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को नाकाम करने की कोशिश की, लेकिन कई मिसाइलों और ड्रोन के मलबे से शहर के विभिन्न हिस्सों में नुकसान हुआ।

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कीव के मेयर विताली क्लिचको ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मलबा गिरने से आग लग गई और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नए जनहानि की पुष्टि नहीं हुई, हालांकि प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की अपील की है।

जेलेंस्की की चेतावनी के कुछ घंटे बाद हमला

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले से एक दिन पहले ही दावा किया था कि खुफिया एजेंसियों को रूस की ओर से बड़े हमले की तैयारी की जानकारी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया था कि रूस अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस और नाटो शिखर सम्मेलन से पहले दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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जेलेंस्की ने कहा था कि रूस का उद्देश्य अधिक से अधिक तबाही मचाना और आम नागरिकों को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाना है। उनके इस बयान के कुछ ही घंटे बाद राजधानी कीव पर व्यापक हमला हो गया।

नाटो बैठक से पहले बढ़ा तनाव

यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब नाटो देशों के नेताओं की अहम बैठक शुरू होने वाली है। सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump सहित कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख हिस्सा लेंगे। बैठक में यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस के खिलाफ आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

विश्लेषकों का मानना है कि सम्मेलन से पहले किया गया यह हमला रूस की ओर से शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्वी यूक्रेन में भी तेज हुआ संघर्ष

रूस पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में लगातार अपने कब्जे का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा चुका है। पिछले कुछ सप्ताह में दोनों देशों ने एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों को लगातार निशाना बनाया है, जिससे युद्ध और अधिक व्यापक तथा खतरनाक होता जा रहा है।

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ट्रंप-पुतिन बातचीत के बाद भी नहीं थमा युद्ध

चार जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने में मदद की पेशकश की थी।

हालांकि, बातचीत के कुछ ही दिनों बाद कीव पर हुए ताजा हमले ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल युद्ध थमने के कोई संकेत नहीं हैं। अब पूरी दुनिया की नजर नाटो शिखर सम्मेलन पर टिकी है, जहां यूक्रेन संकट, सुरक्षा सहयोग और रूस के खिलाफ भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

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