Uttarakhand: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का नाम बदलने की तैयारी, बोर्ड का कार्यकाल भी हो सकता है पांच वर्ष

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार जल्द ही बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव कर सकती है। समिति का नाम बदलकर “बदरी-केदार प्रबंधन बोर्ड” किए जाने के साथ ही बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने और सदस्यों की संख्या 10 से बढ़ाकर 15 किए जाने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से पारित कर शासन को भेज दिया गया है। अब इस पर अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है।

बीकेटीसी का गठन वर्ष 1939 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बने अधिनियम के तहत हुआ था। यही अधिनियम आज भी लागू है। हालांकि, बदलते समय और चारधाम यात्रा के लगातार बढ़ते स्वरूप को देखते हुए समिति का मानना है कि पुराने कानून के कई प्रावधान अब व्यवहारिक नहीं रह गए हैं और प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयां पैदा कर रहे हैं।

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नाम बदलने के पीछे यह है तर्क

बोर्ड का मानना है कि वर्तमान में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के अलावा समिति के अधीन कई अन्य मंदिर भी संचालित हैं। ऐसे में “मंदिर समिति” की बजाय “बदरी-केदार प्रबंधन बोर्ड” नाम अधिक व्यापक और प्रभावी होगा। इससे संस्था की गरिमा और पहचान भी बढ़ेगी, जबकि इसके सभी कार्य मौजूदा अधिनियम के तहत ही संचालित होते रहेंगे।

बोर्ड का कार्यकाल और सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव

बैठक में बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही बोर्ड में सदस्यों की संख्या 10 से बढ़ाकर 15 किए जाने की सिफारिश भी की गई है। प्रस्ताव को तीर्थपुरोहितों सहित सभी बोर्ड सदस्यों की सहमति से मंजूरी दी गई।

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समिति का तर्क है कि बढ़ती जिम्मेदारियों और चारधाम यात्रा के लगातार विस्तार को देखते हुए अधिक सदस्यों वाला बोर्ड निर्णय प्रक्रिया को और प्रभावी बनाएगा तथा दीर्घकालिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

सरकार लेगी अंतिम निर्णय

बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मार्च में आयोजित बोर्ड बैठक में सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए थे और इन्हें शासन को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।

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उन्होंने बताया कि वर्ष 1939 के अधिनियम में कई ऐसे प्रावधान हैं जो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। बोर्ड सदस्यों का मानना है कि इन प्रावधानों में संशोधन से मंदिरों के बेहतर प्रबंधन, प्रशासनिक दक्षता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यदि सरकार इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है तो बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की संरचना और कार्यप्रणाली में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।

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