बोले- उत्तराखंड का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बने…शिक्षा, शोध और तकनीक आधारित विकास पर सरकार का फोकस
भीमताल (नैनीताल)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को युवाओं को भविष्य के लिए तैयार रहने का संदेश देते हुए कहा कि बदलते वैश्विक दौर में सफलता उसी को मिलेगी, जो सीखने की क्षमता, नवाचार की सोच और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को ढालने का साहस रखेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।
भीमताल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य केवल सड़कों और इमारतों से तय नहीं होता, बल्कि उसके विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के सपनों से तय होता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड सरकार ने सेवा, सुशासन और विकास के पांच वर्ष पूरे किए हैं। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे, रोजगार और युवा सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य को नई विकास यात्रा पर आगे बढ़ाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ राज्य में आधुनिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
उन्होंने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में साइंस सिटी, हल्द्वानी में एस्ट्रो पार्क और अल्मोड़ा में साइंस सेंटर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रतिभाशाली है और सरकार उसकी प्रतिभा को सही मंच देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि युवा स्वयं रोजगार स्थापित करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार की सोच विकसित होना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करें। असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसका परिणाम है कि पिछले पांच वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। इससे युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई निःशुल्क व्यावसायिक शिक्षा पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया और विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड के युवा भविष्य में वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासक और सफल उद्यमी बनकर राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक नैनीताल सरिता आर्या, प्रताप सिंह बिष्ट, दर्जा राज्य मंत्री डॉ अनिल कपूर डब्बू, ध्रुव रौतेला, शंकर कोरंगा, दिनेश आर्या,शांति मेहरा, हुकुम सिंह कुंवर, देवेन्द्र सिंह ढेला, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टी सी, मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे ग्राफिक एरा ग्रुप के चैयरमैन कमल घनशाला, निदेशक अनिल कुमार नायर, ओबीसी आयोग के सदस्य डॉ जेड ए वारसी, प्रकाश आर्य सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, संस्थान के प्रतिनिधि, छात्र छात्र आदि मौजूद रहे।

