वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर कड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इस बार निशाने पर ईरान की वह नई एजेंसी आई है, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण के लिए बनाया गया था। इस फैसले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि ईरान की “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” और उससे जुड़े व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि यह एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी। रिपोर्टों के अनुसार ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क वसूलने की तैयारी में था और प्रति जहाज करीब 20 लाख डॉलर तक शुल्क निर्धारित किया गया था।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने कहा कि ईरान का यह कदम उसकी बिगड़ती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में ईरान आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और वॉशिंगटन उस पर दबाव बनाए रखेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि हालात सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।
उधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा है कि केवल उनके निर्धारित समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ही सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि तय मार्ग से हटने वाले जहाज जोखिम में पड़ सकते हैं।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा।
अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया समुद्री प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता। वहीं अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने आत्मरक्षा के तहत ईरानी मिसाइल ठिकानों और ड्रोन गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

