9 पसलियां टूटीं, फेफड़े हुए घायल… फिर भी नहीं टूटा हौसला, अस्पताल के कपड़ों में NEET री-एग्जाम देने पहुंची छात्रा

खबर शेयर करें

नई दिल्ली/कोलकाता। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इसका जीवंत उदाहरण बनीं नीट अभ्यर्थी श्रृष्टि दुबे, जिन्होंने गंभीर सड़क हादसे में बुरी तरह घायल होने के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा और अस्पताल के कपड़ों तथा मेडिकल उपकरणों के साथ नीट 2026 री-एग्जाम में शामिल होकर अदम्य साहस का परिचय दिया।

इस प्रेरणादायक कहानी में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मानवीय पहल भी अहम रही, जिनके हस्तक्षेप से छात्रा को विशेष परिस्थितियों में परीक्षा देने की अनुमति मिल सकी।

14 जून को हुआ था गंभीर सड़क हादसा

जानकारी के अनुसार, श्रृष्टि दुबे 14 जून को एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। हादसा इतना गंभीर था कि उनकी नौ पसलियां टूट गईं और फेफड़ों में गंभीर चोट पहुंची। डॉक्टरों को उनका बड़ा वैस्कुलर ऑपरेशन करना पड़ा और कुछ समय तक उन्हें कृत्रिम वेंटिलेशन पर भी रखा गया।

यह भी पढ़ें 👉  Haldwani: मंदिर में चोरी का खुलासा, शातिर आरोपी गिरफ्तार, पूरा सामान बरामद

परिवार और चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा नजदीक थी। ऐसे में सभी को लग रहा था कि शायद इस वर्ष उनका सपना अधूरा रह जाएगा। लेकिन अस्पताल के बिस्तर पर भी श्रृष्टि का हौसला नहीं टूटा।

पिता ने शिक्षा मंत्री को लिखा भावुक पत्र

श्रृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे, जो एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं, ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर बेटी की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी किसी भी हालत में नीट परीक्षा देना चाहती है और अस्पताल प्रशासन भी आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के साथ परीक्षा दिलाने को तैयार है।

पत्र में उन्होंने विशेष अनुरोध किया कि छात्रा को भूतल पर परीक्षा कक्ष उपलब्ध कराया जाए तथा अस्पताल की पोशाक और चेस्ट ड्रेन जैसे मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा देने की अनुमति दी जाए।

शिक्षा मंत्रालय ने दिखाई संवेदनशीलता

मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल में छात्रा के लिए विशेष व्यवस्था की गई।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में 23 जनवरी को रहेगा सार्वजनिक अवकाश, निजी प्रतिष्ठानों के कर्मियों को मिलेगा सवेतन अवकाश

उन्हें अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाई गई। परीक्षा केंद्र पर मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस भी तैनात रखी गई।

परीक्षा शुरू होते ही मंत्री ने किया फोन

इस पूरी घटना का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया जब परीक्षा शुरू होने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं छात्रा के पिता को फोन कर बेटी की स्थिति और परीक्षा की जानकारी ली।

मंत्री ने छात्रा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करे और भविष्य में डॉक्टर बनकर अपने माता-पिता तथा देश का नाम रोशन करे। उन्होंने यह भी कहा कि कोलकाता दौरे के दौरान वह छात्रा से मिलने का प्रयास करेंगे।

परिवार ने जताया आभार

श्रृष्टि के पिता ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री और अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलता तो उनकी बेटी परीक्षा नहीं दे पाती। वहीं छात्रा की मां ने कहा कि दुर्घटना के बाद उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि उनकी बेटी परीक्षा में शामिल हो सकेगी, लेकिन सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण यह संभव हो पाया।

यह भी पढ़ें 👉  अमेरिका में 43 करोड़ रुपये में ‘गोल्ड कार्ड’, डोनाल्ड ट्रंप ने लॉन्च किया EB-5 वीजा का नया पोर्टल

लाखों छात्रों के बीच बनी प्रेरणा

नीट 2026 री-एग्जाम में देशभर के 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, लेकिन श्रृष्टि दुबे की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है। गंभीर चोटों, ऑपरेशन और अस्पताल के बिस्तर के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान को मुश्किल हालात भी नहीं रोक सकते।

श्रृष्टि का यह जज्बा आज उन सभी छात्रों के लिए संदेश है जो चुनौतियों के सामने हार मान लेते हैं। उनकी कहानी बताती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और संघर्ष का साहस भी जरूरी होता है।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page