प्रेम और सादगी के साथ एक हुए 126 जोड़े, निरंकारी सामूहिक विवाह बना एकत्व की मिसाल

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समालखा (हरियाणा)। प्रेम, विश्वास और सादगी के संगम में 126 नवयुगलों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नए जीवन की शुरुआत की। 79वें निरंकारी संत समागम के समापन के बाद समालखा में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह ने सामाजिक समानता, आपसी सद्भाव और वैश्विक भाईचारे का संदेश दिया।

जयमाला और पुष्पवृष्टि से नवदंपतियों को मिला आशीर्वाद

समारोह का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार की रस्म के साथ हुआ। मिशन की प्रधान राजकुमारी जी और कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखद वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन हुआ, जिसमें विश्वास, सम्मान और समर्पण से भरे गृहस्थ जीवन का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी ने नवदंपतियों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुख, शांति और खुशहाली का आशीर्वाद दिया।

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‘एक-दूसरे के दो पंख बनकर जीवन की चुनौतियों का करें सामना’

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहित जोड़ों को संबोधित करते हुए कहा कि सामूहिक विवाह का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रेम, सादगी और समानता की यह भावना जीवन का हिस्सा बननी चाहिए। पति-पत्नी एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाएं और प्रेम, विश्वास तथा आपसी तालमेल के साथ आगे बढ़ें। उन्हें एक-दूसरे के दो पंख बनकर जीवन की हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर चलते हुए पति-पत्नी एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। विवाह ऐसा पवित्र रिश्ता है, जिसे जीवनभर प्रेम, आदर और समर्पण से निभाया जाना चाहिए। दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह इस संबंध को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने नवदंपतियों को एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने, क्षमा करने और विनम्रता बनाए रखने की प्रेरणा दी। समारोह में सतगुरु माता जी के परिवार के एक सदस्य का विवाह भी संपन्न हुआ।

भारत के 16 राज्यों के साथ तीन देशों से पहुंचे नवयुगल

संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा जी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित समारोह में बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों से नवयुगलों ने भाग लिया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से आए जोड़े भी इस आयोजन में शामिल हुए।

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अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों और संस्कृतियों से जुड़े 126 जोड़ों का एक साथ विवाह के बंधन में बंधना एकत्व, समानता और वैश्विक भाईचारे की अनूठी मिसाल बना। समारोह ने संदेश दिया कि सच्चे रिश्तों की नींव दिखावे या भव्यता पर नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, समर्पण और मानवीय मूल्यों पर टिकी होती है।

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