देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम के तेवर नरम नहीं पड़ रहे हैं। प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि ने ठंड बढ़ा दी है। पहाड़ से लेकर मैदान तक मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में गिरावट का असर महसूस होने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार, 10 अक्तूबर को प्रदेश के नौ जिलों में खराब मौसम की आशंका जताते हुए चेतावनी जारी की है। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 3500 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने के आसार भी जताए गए हैं।
मानसून लौटने के बाद भी क्यों बरस रहे बादल?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्री क्षेत्रों से आने वाली नमी और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय प्रभाव से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल रहा है। इन मौसमी परिस्थितियों के चलते बादल बनने, बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी है।
मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, अक्तूबर में मानसून की विदाई का अर्थ यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने और वातावरण में पर्याप्त नमी मौजूद रहने पर उत्तराखंड में कम समय के भीतर तेज बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी हो सकती है।
पहाड़ों में बढ़ेगी ठंड, सतर्क रहने की सलाह
बारिश और ओलावृष्टि के कारण प्रदेश में ठंड का असर बढ़ने लगा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से तापमान में और गिरावट आ सकती है। मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की जरूरत है।

