Weather: उत्तराखंड में फिर सक्रिय होगा मानसून…आज कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, 29 जुलाई तक तेज बारिश के आसार

खबर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज से भारी बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले के कुछ क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राज्य के अन्य जिलों में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। 29 जुलाई तक उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में रुक-रुक कर तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश का दौर तेज से अति तीव्र हो सकता है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

यह भी पढ़ें 👉  राशिफल 19 जुलाई 2025

लगातार बारिश के चलते पर्वतीय जिलों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने, सड़कें बाधित होने और नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों और चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  राष्ट्रीय खेल: स्वास्थ्य विभाग ने तैयार की 141 मेडिकल टीम, खिलाड़ियों को मिलेगी हेली एंबुलेंस की सुविधा

मौसम विभाग ने पर्वतीय जिलों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों के लिए भी गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, खेतों, नदी-नालों के किनारे और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और अनावश्यक यात्रा न करें।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों पर पार्षद ने जताई नाराज़गी, मुख्य अभियंता से की वार्ता

प्रदेश में लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों और पर्यटकों से मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने और यात्रा से पहले सड़क व मौसम की ताजा जानकारी लेने की अपील की है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने से कई स्थानों पर जलभराव, सड़कें बंद होने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page