रिश्तेदारी में पहुंचे बच्चों ने खाया था पहले से कटा फल, कुछ घंटों बाद बिगड़ी तबीयत, फूड पॉइजनिंग की आशंका
नई दिल्ली। जांजगीर-चांपा जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां तरबूज खाने के बाद एक 15 वर्षीय किशोर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। सभी बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक बच्चे को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि बाकी तीन का इलाज जारी है।
घटना धुरकोट गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्चे अपने परिवार के साथ रिश्तेदारी में मामा के घर आए हुए थे। मृतक की पहचान 15 वर्षीय अखिलेश धीवर के रूप में हुई है, जो पोड़ी दलहा गांव का रहने वाला था। वहीं बीमार बच्चों में 4 वर्षीय श्री धीवर, 12 वर्षीय पिंटू धीवर और 13 वर्षीय हितेश धीवर शामिल हैं।
परिजनों के अनुसार घर में रखा पहले से कटा हुआ तरबूज बच्चों ने खाया था। तरबूज खाने के कुछ घंटों बाद अखिलेश की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। उसे उल्टी, दस्त और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। थोड़ी ही देर में बाकी तीन बच्चों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चों की हालत बिगड़ती देख परिवार में अफरा-तफरी मच गई।
परिजन आनन-फानन में एम्बुलेंस के जरिए बच्चों को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद अखिलेश को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य बच्चों का इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक तीनों बच्चों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर ने बताया कि तरबूज सुबह काटा गया था और कई घंटे बाद बच्चों ने उसे खाया। गर्मी में लंबे समय तक खुले में रखा फल संक्रमित हो सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग की संभावना बढ़ जाती है। शुरुआती जांच में मामला खाद्य विषाक्तता का लग रहा है।
घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं। अधिकारियों ने तरबूज के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। वहीं मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मौत की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।
कलेक्टर के निर्देश पर मेडिकल टीम गांव पहुंची और परिवार के अन्य सदस्यों की भी स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि गर्मियों में कटे हुए फलों को लंबे समय तक खुले में न रखें और ताजा भोजन ही करें। अधिकारियों का कहना है कि लैब और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

