600 रुपये के भुगतान को लेकर हुआ था विवाद, कुछ देर बाद दोबारा पहुंचा आरोपी, पुलिस खंगालेगी कॉल डिटेल, चैट, सर्च हिस्ट्री और लोकेशन
देहरादून। रायपुर क्षेत्र में बुजुर्ग दंपती और महिला की हत्या के मामले में पुलिस अब आरोपी राजकुमार के टूटे हुए मोबाइल फोन को जांच की अहम कड़ी मान रही है। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल बरामद कर लिया है और अब तकनीकी टीम तथा फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से उसमें मौजूद डिजिटल साक्ष्यों को खंगालने की तैयारी है। फोन से कॉल डिटेल, चैट, इंटरनेट सर्च, लोकेशन और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट सामने आने के बाद पुलिस को वारदात से पहले और उसके बाद आरोपी की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस खास तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या से पहले या वारदात के दौरान राजकुमार ने फोन से किसी से संपर्क किया था या नहीं। अगर उसने किसी को कॉल किया, मैसेज भेजा या इंटरनेट पर किसी तरह की जानकारी तलाश की, तो यह जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।
जांच में सामने आया है कि राजकुमार बुजुर्ग दंपती के घर पर प्लंबिंग का काम करता था। मंगलवार को भी वह काम के सिलसिले में उनके घर पहुंचा था। इसी दौरान रुपये के भुगतान को लेकर उसका 80 वर्षीय रमेश कपूर से विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि राजकुमार काम के बदले 600 रुपये मांग रहा था, जबकि रमेश कपूर 300 रुपये देने की बात कह रहे थे। विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार वहां से चला गया।
पुलिस के मुताबिक, कुछ देर बाद वह दोबारा उसी घर पर पहुंचा। इसके बाद उसने रमेश कपूर, उनकी पत्नी रजनी कपूर और मदद के लिए वहां पहुंची शीला पर हमला कर दिया। तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां बुजुर्ग दंपती को मृत घोषित कर दिया गया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।
अब पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि पहली बार घर से निकलने और दोबारा लौटने के बीच राजकुमार ने क्या किया? इसी अवधि की उसकी डिजिटल गतिविधियों को पुलिस बारीकी से खंगाल रही है। फोन की जांच से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि उसने इस दौरान किसी परिचित से संपर्क किया था या नहीं और उसकी लोकेशन क्या रही।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक आरोपी का मोबाइल टूटा हुआ मिला है। ऐसे में फोन से डाटा निकालने के लिए तकनीकी टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस इंटरनेट सर्च, गूगल गतिविधि, कॉल लॉग, मैसेजिंग एप और लोकेशन संबंधी जानकारी की जांच कर सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वारदात से पहले आरोपी ने हत्या या किसी अन्य संबंधित विषय को लेकर इंटरनेट पर कोई जानकारी तलाश की थी या नहीं।
पुलिस अब मोबाइल से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्यों को घटनास्थल से मिले सबूतों और सीसीटीवी फुटेज से मिलाकर देख रही है। डिजिटल फुटप्रिंट अगर घटनाक्रम से मेल खाते हैं तो हत्या से पहले आरोपी की तैयारी, वारदात के दौरान उसकी गतिविधियों और घटना के बाद उसके फरार होने की पूरी कड़ी को जोड़ने में पुलिस को मदद मिल सकती है।

