नौकरी के साथ जारी रखी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, विपरीत परिस्थितियों में हासिल किया मुकाम, मां और शिक्षकों के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय
हल्द्वानी। ओखलकांडा के सुनी गांव निवासी लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की अपर निजी सचिव (APS) परीक्षा में उन्होंने 28वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी सफलता से परिवार के साथ ही गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
लक्ष्मण सिंह वर्तमान में सिंचाई विभाग, अल्मोड़ा में वैयक्तिक सहायक के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। इससे पहले वह उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वैयक्तिक सहायक-स्टेनो परीक्षा में भी सफल हुए थे। इसके बाद UKPSC की अपर निजी सचिव परीक्षा में 28वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत को एक और मुकाम तक पहुंचाया।
सुनी गांव, पोस्ट ऑफिस बेड़चूला निवासी लक्ष्मण की प्रारंभिक शिक्षा हल्द्वानी के मोतीराम बाबूराम इंटर कॉलेज से हुई, जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से प्राप्त की। पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सरकारी सेवा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया और नौकरी के साथ परीक्षा की तैयारी जारी रखी।
लक्ष्मण की सफलता में उनकी मां सुशीला तिवारी के संघर्ष की भी अहम भूमिका रही। राजकीय चिकित्सालय में वार्ड आया के पद पर कार्यरत सुशीला तिवारी ने वर्ष 2001 में पति के निधन के बाद बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। बेटे की उपलब्धि को उन्होंने परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया।
लक्ष्मण ने आशुलिपि और स्टेनोग्राफी की तैयारी हल्द्वानी स्थित एक्सीलेंट शॉर्टहैंड संस्थान में आरपी जोशी के मार्गदर्शन में की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत को दिया।
लक्ष्मण की सफलता की खबर मिलते ही गांव और क्षेत्र में बधाइयों का दौर शुरू हो गया। सिंचाई खंड अल्मोड़ा के अधिशासी अभियंता और उनके शिक्षक आरपी जोशी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
लक्ष्मण सिंह ने उत्तराखंड सरकार के नकल विरोधी कानून की सराहना करते हुए कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से मेहनती एवं प्रतिभावान युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरकारी सेवा में भविष्य बनाने का सपना देखते हैं।
