आरईसी ने वन भूमि के विकल्प पर उठाए सवाल, मदनपुर-बेरीपड़ाव समेत तीन स्थलों का निरीक्षण, गैर-वन भूमि पर फोकस
हल्द्वानी। नैनीताल से उत्तराखंड हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने की योजना एक बार फिर जमीन के पेच में उलझ गई है। बेलबाबा क्षेत्र में प्रस्तावित 30 हेक्टेयर वन भूमि के प्रस्ताव को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय सशक्त समिति (आरईसी) ने रद कर दिया है। समिति की ओर से गैर-वन भूमि पर वैकल्पिक स्थल तलाशने का मुद्दा उठाए जाने के बाद अब प्रशासन ने नए ठिकाने की तलाश तेज कर दी है। बुधवार को अधिकारियों ने गौलापार के मदनपुर और बेरीपड़ाव समेत तीन स्थलों का निरीक्षण किया। तीनों स्थल गैर-वन भूमि बताए जा रहे हैं।
हाई कोर्ट शिफ्टिंग के लिए बेलबाबा क्षेत्र में जमीन प्रस्तावित होने के बाद वन भूमि हस्तांतरण और पेड़ों के कटान का मुद्दा लगातार चुनौती बना हुआ था। अब आरईसी की आपत्ति के बाद अधिकारियों का जोर ऐसी जमीन तलाशने पर है, जहां वन भूमि से जुड़ी औपचारिकताओं से बचते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।
गौलापार में तीन जगह देखी जमीन
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को अधिकारियों ने गौलापार के मदनपुर और बेरीपड़ाव क्षेत्र में करीब 30 हेक्टेयर भूमि का निरीक्षण किया। इसके अलावा गौलापार में ही एक अन्य स्थल भी देखा गया। हाई कोर्ट शिफ्टिंग के लिए इन तीनों स्थानों को संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, अधिकारी निरीक्षण और जमीन के चयन को लेकर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आरईसी की ओर से गैर-वन भूमि पर विकल्प तलाशने की बात उठाए जाने के बाद अब इसी दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी दिनों में नैनीताल जिले के अन्य क्षेत्रों में भी जमीनों का निरीक्षण किए जाने की संभावना है।
123 पेड़ों के कटान से जुड़ा था बेलबाबा का प्रस्ताव
दरअसल, हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के लिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग की भाखड़ा रेंज में बेलबाबा मंदिर के सामने 30 हेक्टेयर वन भूमि प्रस्तावित की गई थी। इस जमीन पर हाई कोर्ट परिसर विकसित करने की योजना थी।
वन विभाग की गणना के अनुसार, प्रस्तावित स्थल पर सागौन के 75 और पीपल के तीन पेड़ों के अलावा यूकेलिप्टस, सेमल, हल्दू, खैर सहित अन्य प्रजातियों के कुल 123 पेड़ों का कटान होना था। इसके बदले 60 हेक्टेयर क्षेत्र में क्षतिपूरक वनीकरण प्रस्तावित था।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए तीन करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान किया गया था, जबकि वनीकरण की लागत तीन करोड़ 46 लाख रुपये से अधिक आंकी गई थी। वन भूमि के उपयोग और पेड़ों के कटान से जुड़ी प्रक्रिया के बीच अब प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में बाधा आ गई है।
अब नए स्थल की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
आरईसी की आपत्ति के बाद हाई कोर्ट शिफ्टिंग के लिए नए स्थल का चयन महत्वपूर्ण हो गया है। प्रशासन की ओर से गैर-वन भूमि पर संभावनाएं तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि निरीक्षण किए गए स्थलों में से किस जमीन को उपयुक्त माना जाता है और किसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है।

