सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: डेटा शेयरिंग पर व्हाट्सएप-मेटा को फटकार, नियम नहीं माने तो देश छोड़ने की नसीहत

खबर शेयर करें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी मूल कंपनी मेटा को डेटा शेयरिंग के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि भारत के नियमों का पालन नहीं करना है, तो कंपनी को देश छोड़कर चले जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि डेटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Supreme Court Slams Meta-WhatsApp Over Data Sharing, Stresses on User Privacy: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत व्हाट्सएप को एक भी जानकारी किसी दूसरी कंपनी के साथ साझा करने की अनुमति नहीं देगी। व्हाट्सएप की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि उपयोगकर्ताओं के पास शर्तों को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प होता है, लेकिन इस पर कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

यह भी पढ़ें 👉  पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला...बांध परियोजना की चौकी पर धावा, 9 पुलिसकर्मियों की मौत, कई लापता

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक आम आदमी इन जटिल टर्म्स एंड कंडीशंस को कैसे समझ सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क किनारे सब्जी बेचने वाला व्यक्ति या दूर-दराज गांव में रहने वाला, जो केवल अपनी स्थानीय भाषा जानता है, वह अंग्रेजी में लिखी शर्तों को कैसे समझेगा।

कोर्ट ने मेटा पर आरोप लगाया कि कंपनी को सिर्फ अपना मुनाफा दिखाई देता है। पीठ ने कहा कि मेटा यह अच्छी तरह जानती है कि लोग व्हाट्सएप के आदी हो चुके हैं और इसका उपयोग हर वर्ग करता है, बावजूद इसके उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें 👉  इंग्लैंड के दिग्गज अंपायर डिकी बर्ड का 92 वर्ष की उम्र में निधन

मुख्य न्यायाधीश ने मेटा से अंडरटेकिंग मांगी कि कंपनी किसी भी स्थिति में उपयोगकर्ताओं का डेटा साझा नहीं करेगी, तभी मामले की मेरिट पर आगे सुनवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाट्सएप एक मैसेजिंग और संचार सेवा है, न कि डेटा इकट्ठा कर उसे बेचने का माध्यम।

इस दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट निजता की सुरक्षा की बात करता है, लेकिन कंपनियां ऑनलाइन विज्ञापन के लिए डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन मिलने के कुछ ही मिनटों में उससे जुड़े विज्ञापन आना, डेटा के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

यह भी पढ़ें 👉  ईरान पर ट्रंप का अल्टीमेटम: ‘समझौता नहीं तो तबाही तय’, स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए एयरस्पेस किया बंद

कोर्ट ने बताया कि इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। मेटा को अपना जवाब दाखिल करना है, जिस पर केंद्र सरकार भी अपनी प्रतिक्रिया देगी। यह पूरा मामला व्हाट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि उपयोगकर्ताओं की निजता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page