ईरान की सत्ता पर ‘परदे के पीछे’ से नियंत्रण? Mojtaba Khamenei को लेकर चौंकाने वाले दावे, जनरलों की सलाह से चल रहा शासन

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नई दिल्ली : ईरान की सत्ता संरचना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए और चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। अमेरिकी अखबार The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े Mojtaba Khamenei इस समय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) के वरिष्ठ जनरलों की सलाह पर निर्भर होकर शासन चला रहे हैं। बताया जा रहा है कि अहम फैसले अब सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं।

रिपोर्ट में पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad के करीबी माने जाने वाले ईरानी नेता Abdolreza Davari के हवाले से दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई एक “बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स” की तरह सिस्टम चला रहे हैं, जहां असल निर्णय लेने की भूमिका शीर्ष सैन्य अधिकारियों के पास है।

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बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में मोजतबा खामेनेई सीधे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं और एक गुप्त ठिकाने से काम कर रहे हैं। उनके निर्देश कथित तौर पर हस्तलिखित पत्रों के जरिए भरोसेमंद संदेशवाहकों तक पहुंचाए जाते हैं। ये संदेश सुरक्षित चैनलों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं और जवाब भी उसी तरह वापस पहुंचाए जाते हैं।

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रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 28 फरवरी को हुए कथित अमेरिकी-इजरायली हमलों में उनके पिता Ali Khamenei की मौत के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। इस हमले में मोजतबा खामेनेई के गंभीर रूप से घायल होने और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के मारे जाने की भी बात कही गई है।

वर्तमान में उनकी सुरक्षा और इलाज को लेकर कड़े प्रतिबंध होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि केवल चुनिंदा डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को ही उनसे मिलने की अनुमति है। उनके इलाज की निगरानी ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर की जा रही है।

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स्वास्थ्य को लेकर भी कई गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मोजतबा खामेनेई मानसिक रूप से सक्रिय हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से बोलने से बच रहे हैं और केवल लिखित संदेशों के जरिए ही संवाद कर रहे हैं।

हालांकि, इन सभी दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे देश में आंतरिक राजनीतिक और सैन्य गतिविधियां अक्सर गोपनीय रखी जाती हैं, इसलिए ऐसी रिपोर्ट्स को सावधानी से समझने की जरूरत है।

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