हल्द्वानी। छोटी सी भाड़ा पर्ची, न कोई बिल, न कोई बिल्टी… और लाखों रुपये के टैक्स चोरी का माल बेधड़क एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है। कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर और किच्छा में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में इस तरह की गतिविधियां धड़ल्ले से चलने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कोई छिटपुट मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है, जिसे कथित तौर पर सांठगांठ के सहारे संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि टैक्स चोरी रोकने के लिए जिम्मेदार कुछ अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के बीच पुराना गठजोड़ बना हुआ है, जिसके चलते कार्रवाई अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है।
बताया जाता है कि जब कभी सड़कों पर चेकिंग के दौरान विभागीय टीमें टैक्स चोरी के माल से लदे वाहनों को पकड़ती हैं, तो खेल यहीं से पलट जाता है। कारोबारी कथित तौर पर फोन के जरिए संपर्क साधते हैं और उसके बाद हालात बदल जाते हैं। कई मामलों में टीमों को वाहन छोड़ने के निर्देश तक दिए जाने की बात सामने आती है।
हाल ही में हल्द्वानी ट्रांसपोर्ट नगर में सामने आया एक मामला इस पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, राज्य कर विभाग की टीम ने गुटका (तंबाकू) व अन्य सामान से लदा एक ट्रक पकड़ा था। लेकिन जैसे ही कारोबारी को इसकी जानकारी मिली, उसने कथित तौर पर संबंधित अधिकारी को फोन किया और कुछ ही देर में वाहन को छोड़ने के निर्देश दे दिए गए।
इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि टैक्स चोरी का यह खेल सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम के भीतर तक इसकी जड़ें फैली होने की आशंका है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली और उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों से आने वाले ट्रकों में माल के साथ केवल एक साधारण भाड़ा पर्ची होती है, जिसमें सिर्फ किराया दर्ज होता है। न कोई वैध बिल होता है, न बिल्टी—यानी माल का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं। यही पर्ची पूरे खेल की ‘ढाल’ बन जाती है।
ट्रक चालक यह पर्ची ट्रांसपोर्टर को सौंपता है और फिर संबंधित व्यापारी से किराया वसूला जाता है। इस प्रक्रिया में टैक्स का कोई हिसाब-किताब दर्ज नहीं होता, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है।
इस कथित नेटवर्क से ईमानदार कारोबारियों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि बिना टैक्स के बाजार में आ रहा सस्ता माल उनके व्यापार को प्रभावित कर रहा है और प्रतिस्पर्धा असमान हो रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर “भाड़ा पर्ची” के सहारे चलता यह खेल यूं ही जारी रहेगा।

