एवियन (फ्रांस)। जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में पश्चिम एशिया की सुरक्षा, अमेरिका-ईरान समझौते, क्षेत्रीय स्थिरता और लेबनान की स्थिति सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका-ईरान समझौते को सकारात्मक बताते हुए कहा कि यह सफल होना चाहिए और इसके अगले चरण की वार्ताएं पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ईरान में धन निवेश करने की कोई योजना नहीं है और न ही ऐसी कोई बाध्यता है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान इस दिशा में आगे बढ़ता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वह सत्ता परिवर्तन की राजनीति में विश्वास नहीं रखते और ईरान के साथ बातचीत में शामिल लोगों को समझदार एवं व्यवहारिक बताया।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों को समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार युद्ध में लगातार सैनिकों की जान जा रही है और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत हुई है और आगे भी वार्ता जारी रहेगी।
कतर के अमीर शेख तमीम ने ट्रंप के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका-ईरान समझौता क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी काफी काम बाकी है, लेकिन सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा सकती है।
ट्रंप ने क्षेत्रीय संकटों के दौरान कतर की भूमिका की भी प्रशंसा की और कहा कि ईरान के निकट होने के बावजूद कतर ने संतुलित एवं जिम्मेदार रुख अपनाया है।
इस दौरान ट्रंप ने लेबनान में हुई हालिया सैन्य कार्रवाई पर असंतोष भी जताया। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से पहले हुई कार्रवाई उन्हें पसंद नहीं आई और उन्होंने इस संबंध में अपनी राय स्पष्ट रूप से व्यक्त की है।
बैठक में ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और इस्राइल के संबंध मजबूत हैं, लेकिन क्षेत्रीय मुद्दों पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौते के औपचारिक दस्तावेज को निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। उनके अनुसार यह समझौता क्षेत्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप पहले भी वर्ष 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) की आलोचना कर चुके हैं और वर्ष 2018 में अमेरिका को उस समझौते से अलग करने का निर्णय लिया था। अब नए समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा जारी है।

