हल्द्वानी: ‘किंग मेकर’ बनने की चाह में कथित ट्रांसपोर्टर ने बनाया गिरोह, शिकंजा कसने से उड़ी नींद

खबर शेयर करें

हल्द्वानी। ट्रांसपोर्ट नगर में चल रहे टैक्स चोरी के सिंडिकेट पर अब शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, टैक्स चोरी में शामिल कारोबारियों के गिरोह में एक व्यक्ति ऐसा है, जो पूरे गिरोह पर अपना नियंत्रण रखना चाहता था। उसकी योजना थी कि वह इस कारोबार को अपने नियंत्रण में करके ‘किंग मेकर’ बन सके। लेकिन सोशल मीडिया में लगातार फैल रही खबरों ने उसकी रणनीतियों पर पानी फेर दिया और उसकी नींद उड़ा दी।

सूत्र बताते हैं कि कथित कारोबारी लंबे समय से ट्रांसपोर्ट नगर में टैक्स चोरी में शामिल है और इस काले कारोबार से अपनी संपत्ति भी बढ़ा चुका था। वह यह खेल ऐसे कारोबारियों की आड़ में चला रहा था, ताकि खुद को ‘किंग मेकर’ के रूप में स्थापित कर सके। सूत्रों के अनुसार, इस कारोबारी के राजनैतिक संपर्क भी रहे हैं, हालांकि उसे उनका अधिक महत्व नहीं मिलता।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में नाबालिग ने दिया बच्ची को जन्म, पुलिस ने पॉक्सो में दर्ज किया मुकदमा

सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले कथित कारोबारी ने राज्य कर विभाग के एक अधिकारी के साथ अभद्रता की थी। इस घटना के दौरान उसने अधिकारी से इतनी गाली-गलौच की कि मौके पर लोग इकट्ठा हो गए थे। इसके बाद कारोबारी ने एक स्थानीय जनप्रतिनिधि को फोन किया, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, कुछ समय बाद उक्त अधिकारी का तबादला दूसरे स्थान पर हो गया। यह मामला वर्तमान में भी ट्रांसपोर्ट नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह भी पढ़ें 👉  स्मार्ट मीटरिंग से यूपीसीएल की कमाई को रफ्तार...एक दिन में 3.88 लाख उपभोक्ताओं की रीडिंग, 390 करोड़ के बिल जारी

टैक्स चोरी पर कसा शिकंजा, माल वाहनों की संख्या में आई कमी
हल्द्वानी:।
ट्रांसपोर्ट नगर में चल रही टैक्स चोरी की गतिविधियों पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया में इस मुद्दे को लेकर लगातार खबरें चलने के बाद, जहां टैक्स चोरी में लिप्त कारोबारी घबराए हुए हैं, वहीं राज्य कर विभाग ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, इन दिनों ट्रांसपोर्ट नगर में बाहरी शहरों और राज्यों से माल लेकर आने वाले वाहनों की संख्या में भारी कमी आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यहां टैक्स चोरी से जुड़े सबसे ज्यादा माल की गतिविधियां चल रही थीं, जिनसे कारोबारी अवैध तरीके से मुनाफा कमा रहे थे। इस प्रकार की गतिविधियों के चलते उत्तराखंड सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें 👉  ऊपर की शह, सिफारिशी तैनाती और कमीशन का खेल, कुमाऊं में टैक्स चोरी का ‘प्री-प्लान’ नेटवर्क बेनकाब
Ad

You cannot copy content of this page