17 फरवरी को बनेगा अद्भुत खगोलीय संयोग, भारत में नहीं होंगे दर्शन
नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी को लगेगा। यह एक विशेष प्रकार का चक्राकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 12:31 बजे शुरू होगा और लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक अपने चरम पर रहेगा। हालांकि यह दुर्लभ खगोलीय घटना दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगी, भारत में इसके दर्शन संभव नहीं होंगे क्योंकि उस समय सूर्य भारतीय क्षितिज के नीचे रहेगा।
क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’ ग्रहण?
जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, तब सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, चक्राकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है। इसी कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता।
परिणामस्वरूप चंद्रमा एक काले डिस्क की तरह दिखाई देता है और उसके चारों ओर सूर्य का चमकदार घेरा बन जाता है। यही चमकता हुआ छल्ला ‘रिंग ऑफ फायर’ कहलाता है। इस बार चंद्रमा सूर्य के केंद्र का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक लेगा, लेकिन किनारों पर सूर्य की तेज रोशनी बनी रहेगी।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण?
यह ग्रहण दक्षिणी गोलार्ध में घटित होगा। उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए देश के किसी भी हिस्से से इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।
हालांकि खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से इस दुर्लभ घटना को देख सकेंगे।
इन देशों में दिखेगा शानदार नजारा
इस सूर्य ग्रहण का सबसे स्पष्ट और प्रभावशाली दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा, खासकर वहां स्थित कॉनकॉर्डिया और मिर्नी अनुसंधान केंद्रों के आसपास।
इसके अलावा दक्षिणी अफ्रीका के कई देशों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा, जिनमें दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे शामिल हैं। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, विशेषकर अर्जेंटीना, चिली में भी यह ग्रहण आंशिक रूप से नजर आएगा।
वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए खास मौका
साल 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य भले ही दुनिया के चुनिंदा हिस्सों तक सीमित रहेगा, लेकिन यह घटना हमारे सौरमंडल की जटिल गतिशीलता और प्रकृति के अद्भुत संतुलन की झलक पेश करती है। पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा का यह दुर्लभ संयोग एक बार फिर ब्रह्मांड की विशालता और उसकी अद्भुत सुंदरता को महसूस कराने वाला है।
