केरल में भाजपा का ‘तीसरा ध्रुव’ से निर्णायक शक्ति तक सफर, तीन सीटों पर ऐतिहासिक जीत

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तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया, जब विधानसभा चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन सीटों पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। लंबे समय तक ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में देखी जाने वाली पार्टी अब राज्य में एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है।

सबसे बड़ी जीत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने राजधानी की चर्चित नेमोम सीट से दर्ज की, जहां उन्होंने करीब 4,900 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं कोल्लम जिले की चथन्नूर सीट से भाजपा उम्मीदवार बीबी गोपकुमार ने 4,398 वोटों से जीत दर्ज की। इसके अलावा वी मुरलीधरन ने कझाकोट्टम सीट से महज 428 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

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इस जीत के साथ ही भाजपा को पहली बार केरल विधानसभा में तीन सीटें मिली हैं। पार्टी नेतृत्व ने इसे बड़ा राजनीतिक बदलाव करार दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि अब विधानसभा में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के तीन विधायक होंगे। उन्होंने कांग्रेस और वाम दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले भाजपा का खाता भी नहीं खुलने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन जनता ने इन दावों को खारिज कर दिया।

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उन्होंने कहा कि यह चुनाव ‘माकपा विरोधी जनादेश’ के रूप में सामने आया है, जिसमें जनता ने भ्रष्टाचार और सबरीमाला जैसे मुद्दों पर अपना मत स्पष्ट किया है।

गौरतलब है कि नेमोम सीट भाजपा के लिए विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2016 में ओ. राजगोपाल ने यहीं से जीत दर्ज कर केरल विधानसभा में पार्टी का खाता खोला था। हालांकि 2021 में पार्टी यह सीट हार गई थी, लेकिन 2026 में इसे फिर से जीतकर भाजपा ने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।

चथन्नूर सीट पर भी भाजपा का आधार लगातार मजबूत होता रहा है, जहां बीबी गोपकुमार ने कई चुनावों में अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया था और इस बार जीत में तब्दील कर दिया।

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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में सुरेश गोपी की जीत और 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता के बाद भाजपा को राज्य में नई ऊर्जा मिली है।

दशकों से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीमित रही राजनीति में अब भाजपा ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में केरल की सियासत त्रिकोणीय हो सकती है।

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