नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। तीन-भाषा नीति को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही असमंजस की स्थिति के बीच शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत वे छात्र, जिन्होंने दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें बीच में अपनी भाषाएं बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे विद्यार्थी कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
शिक्षा मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण से उन हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता दूर हो गई है, जिन्हें आशंका थी कि नई भाषा नीति लागू होने के बाद उन्हें अपनी चुनी हुई विदेशी भाषाओं को छोड़कर दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रूप से लेनी पड़ेंगी।
भविष्य के बैचों पर लागू होगी नई व्यवस्था
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता केवल भविष्य के छात्रों पर लागू होगी। यह नियम कक्षा 6 से शुरू होने वाले नए बैचों के लिए प्रभावी रहेगा। वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों पर इस नियम को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा।
इसका अर्थ यह है कि जो विद्यार्थी पहले से अपनी भाषा का चयन कर चुके हैं, उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और उन्हें नए नियमों के कारण किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
‘नीति में बदलाव नहीं, केवल स्थिति स्पष्ट की गई’
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार ने किसी प्रकार की नई छूट नहीं दी है और न ही तीन-भाषा नीति से पीछे हटने का कोई फैसला लिया गया है।
अधिकारी के अनुसार, यह प्रावधान पहले से नीति का हिस्सा था, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा गया था। इसी कारण छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब मंत्रालय ने इस स्थिति को स्पष्ट कर दिया है ताकि भविष्य में किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
24 लाख छात्रों में केवल 30 हजार पर पड़ता है असर
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष लगभग 24 लाख छात्र CBSE की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं। इनमें से केवल करीब 30 हजार छात्र ही दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं।
यानी लगभग 98.5 प्रतिशत छात्र पहले से ही तीन-भाषा फॉर्मूले के अनुरूप अध्ययन कर रहे हैं। इसलिए यह राहत मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों के उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए दो विदेशी भाषाओं का चयन किया था।
क्या था पूरा विवाद?
मई 2026 में CBSE ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी।
इस सर्कुलर के सामने आने के बाद देशभर के कई छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई। उनका कहना था कि जो विद्यार्थी पहले से दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें बीच में भाषा बदलने के लिए मजबूर करना उचित नहीं होगा। देखते ही देखते यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित समान मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। अब इस मामले पर आगे विस्तृत सुनवाई होगी।
जल्द जारी होगा आधिकारिक आदेश
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस स्पष्टीकरण को शामिल करते हुए जल्द ही औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद सभी CBSE स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भेजे जाएंगे, जिससे छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
छात्रों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
इस फैसले के बाद वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को अपनी चुनी हुई विदेशी भाषाएं छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। वे बिना किसी बदलाव के कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। वहीं, दो भारतीय भाषाओं की अनिवार्यता केवल भविष्य में कक्षा 6 से शुरू होने वाले नए बैचों पर लागू होगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण से न केवल छात्रों की चिंता दूर होगी, बल्कि स्कूलों को भी भाषा नीति लागू करने में स्पष्टता मिलेगी। साथ ही, नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों और पहले से पढ़ रहे छात्रों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में भी यह फैसला अहम साबित होगा।

