गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे की खबर से प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। उमेश कुमार ने सदन में विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। बुधवार को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। दी गई जानकारी के मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार कर आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
‘जनहित के मुद्दों पर नहीं मिला विपक्ष का साथ’
विधायक उमेश कुमार ने अपने फैसले के पीछे विपक्ष से मिली कथित निराशा को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्होंने किसानों और जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए, लेकिन इन मामलों में विपक्ष का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
उमेश कुमार के मुताबिक, जब भी विपक्ष ने धरना-प्रदर्शन किया या सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया, वह उनके साथ खड़े रहे। यहां तक कि विधानसभा के वेल में रात बिताने के दौरान भी उन्होंने विपक्ष का साथ दिया। इसके बावजूद, जब उन्होंने किसानों और जनता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के समर्थन की उम्मीद की, तो उन्हें निराशा हाथ लगी।
निर्दलीय विधायक बोले- जनता ने भरोसा जताकर विधानसभा भेजा
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उमेश कुमार ने कहा कि खानपुर की जनता ने उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा था।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं और किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना उनकी प्राथमिकता रही है। इन मुद्दों पर विपक्ष से एकजुटता की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें ऐसा समर्थन नहीं मिला, जिसकी उन्हें अपेक्षा थी।
विधायक ने कहा कि बड़े जनहित के मुद्दों पर उन्होंने बार-बार विपक्ष की ओर उम्मीद से देखा, ताकि उनकी आवाज को सदन में मजबूती मिल सके। लेकिन, उनके अनुसार, ऐसा नहीं हुआ। इसी नाराजगी और निराशा के चलते उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया।
कांग्रेस या भाजपा में जाने की अटकलों पर लगाया विराम
उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद उनके किसी राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो वह कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भाजपा में शामिल होने की उनकी कोई योजना है। उनके इस बयान के बाद फिलहाल किसी भी दल में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस्तीफे के बाद आगे क्या?
उमेश कुमार ने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर दूसरे जनप्रतिनिधि भी उनके साथ आगे आएंगे। उनके इस्तीफे से उत्तराखंड विधानसभा की राजनीति में नए घटनाक्रम की संभावना बन गई है।

