नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ के दो अलग-अलग मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली और पंजाब में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में अवैध हथियार, पिस्तौल और कई खतरनाक पेट्रोल बम (मोलोटोव कॉकटेल) बरामद किए गए हैं। मामले की जानकारी सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रेस वार्ता के दौरान दी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी दो अलग-अलग मॉड्यूल के जरिए संगठित तरीके से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक मॉड्यूल का संबंध कथित तौर पर देश विरोधी साजिशों और आतंक से जुड़े संभावित नेटवर्क से था, जबकि दूसरा मॉड्यूल अवैध हथियारों की तस्करी कर अपराधियों और गैंगस्टरों तक हथियार पहुंचाने का काम कर रहा था।
स्पेशल सेल के अधिकारियों के अनुसार, पहले मॉड्यूल के सदस्य किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। वहीं दूसरा मॉड्यूल विभिन्न राज्यों में सक्रिय आपराधिक गिरोहों को हथियार उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि दोनों मॉड्यूल आपस में समन्वय बनाकर बेहद गोपनीय तरीके से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
छापेमारी के दौरान बरामद हथियारों और मोलोटोव कॉकटेल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों और पेट्रोल बमों का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया जाना था। बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के तार केवल दिल्ली और पंजाब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर स्पेशल सेल विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनसे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्य संभावित ठिकानों पर भी छापेमारी जारी है। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच कितनी व्यापक थी तथा इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

