एकतरफा प्रेम की सनक, बार-बार की गई शिकायतें और दूल्हा बाजार में दिनदहाड़े बहा खून
देहरादून: सोमवार की सुबह दूल्हा बाजार रोज़ की तरह खुला था। दुकानें सज रही थीं, लोग काम पर जा रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही मिनटों में यह इलाका खून, चीख और खामोशी का गवाह बन जाएगा। 23 वर्षीय गुंजन की सरेआम निर्मम हत्या ने न सिर्फ दूल्हा बाजार बल्कि पूरे देहरादून को भीतर तक हिला दिया। लोग डरे हुए हैं, गुस्से में हैं और एक ही सवाल पूछ रहे हैं-क्या यह हत्या रोकी जा सकती थी?
A Murder Foretold by Warnings: गुंजन की हत्या कोई अचानक हुआ अपराध नहीं थी। यह उस खतरे का अंजाम थी, जिसकी जानकारी पुलिस को पहले से थी। परिजनों ने बताया कि गुंजन की जान को खतरा बताते हुए उन्होंने महज तीन दिन पहले खुड़बुड़ा चौकी में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में साफ कहा गया था कि आरोपी युवक जान से मारने की धमकी दे रहा है। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

परिजनों के मुताबिक, यह पहली शिकायत नहीं थी। करीब आठ महीने पहले भी गुंजन और आरोपी आकाश कुमार के बीच विवाद हुआ था। तब पुलिस ने दोनों को बुलाकर समझाइश दी और मामला शांत मान लिया गया। लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ—वह भीतर ही भीतर और खतरनाक होता चला गया।
गुंजन गोविंदगढ़ की रहने वाली थी और दूल्हा बाजार में कपड़ों की एक दुकान पर काम करती थी। आरोपी आकाश कुमार, मन्नूगंज खुड़बुड़ा मोहल्ले का निवासी है और वह भी उसी बाजार की एक अन्य दुकान में कार्यरत था। दोनों एक-दूसरे को पिछले तीन वर्षों से जानते थे। शुरुआत में दोस्ती थी, लेकिन यह दोस्ती तब बोझ बन गई जब गुंजन को पता चला कि आकाश शादीशुदा है।
इसके बाद गुंजन ने उससे दूरी बना ली। परिजनों ने एहतियातन उसका फोन तक ले लिया, ताकि संपर्क पूरी तरह टूट जाए। कुछ समय तक बातचीत बंद भी रही, लेकिन आरोपी ने पीछा नहीं छोड़ा। वह काम पर जाते समय गुंजन का पीछा करता था, दबाव बनाता था और धमकियां देता था। इसे लेकर कई बार पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन हर बार मामला अनसुना रह गया।
तीन दिन पहले हालात और गंभीर हो गए। परिजनों के अनुसार, आरोपी ने एक अन्य व्यक्ति से कहा कि वह गुंजन को जान से मार देगा। यही बात सुनकर परिवार घबरा गया और तुरंत खुड़बुड़ा चौकी पहुंचा। आरोप है कि इन तीन दिनों में पुलिस न तो आरोपी से आमने-सामने मिली और न ही फोन पर बात करना जरूरी समझा। और फिर सोमवार की सुबह, वही आशंका हकीकत बन गई।
चश्मदीदों के मुताबिक, सुबह करीब 10 बजे गुंजन रोज़ की तरह पलटन बाजार स्थित दुकान पर काम के लिए पहुंची थी। वह बाजार की गली में अपने परिचित के यहां स्कूटी खड़ी कर रही थी, तभी आरोपी स्कूटर से वहां आ धमका। उसने बात करने की कोशिश की। गुंजन ने विरोध किया। इसी पल आरोपी ने स्कूटर से चापड़ निकाला और उसकी गर्दन पर वार कर दिया।
इसके बाद आरोपी ने गुंजन को दीवार की ओर धकेल दिया और गर्दन व चेहरे पर एक के बाद एक कई वार किए। बचाव के प्रयास में उसकी उंगलियां कट गईं, चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया। खून से लथपथ गुंजन वहीं गिर पड़ी। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
वारदात के बाद आरोपी चापड़ लहराते हुए मौके से फरार हो गया, जिससे पूरे बाजार में दहशत फैल गई। पुलिस ने करीब एक घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया और हत्या में प्रयुक्त चापड़ भी बरामद कर ली। आरोपी ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
मामले के सामने आते ही पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई। एसएसपी अजय सिंह ने कार्रवाई में कोताही बरतने पर खुड़बुड़ा चौकी इंचार्ज प्रद्युम्न नेगी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। यह कार्रवाई इस बात की ओर इशारा कर रही है कि शिकायतों को गंभीरता से न लेने में चूक हुई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी आकाश का आपराधिक इतिहास भी है। वह पहले चोरी के मामले में जेल जा चुका है और करीब डेढ़ महीने तक जेल में रहा था। इसी कारण कुछ समय पहले उसे एक दुकान से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में उसी बाजार की दूसरी दुकान में उसे काम मिल गया। इसे लेकर भी स्थानीय लोगों में आक्रोश है कि बिना पृष्ठभूमि जांचे किसी व्यक्ति को काम पर कैसे रखा गया।
आज दूल्हा बाजार पहले जैसा नहीं है। दुकानों पर सन्नाटा है, कामकाजी महिलाओं के चेहरों पर डर है और लोगों की बातचीत में एक ही सवाल बार-बार उभर रहा है-जब खतरे की चेतावनी पहले ही दे दी गई थी, तो सिस्टम ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया?
गुंजन की हत्या अब सिर्फ एक अपराध नहीं है। यह उन आवाज़ों की कहानी है, जो बार-बार चौकी तक पहुंचीं, लेकिन समय रहते सुनी नहीं गईं। दून आज शोक में नहीं, जवाब की तलाश में खड़ा है।
