हल्द्वानी। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के दावों की हकीकत कुमाऊं मंडल में खुलती नजर आ रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी “जीरो टॉलरेंस” का दम भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऊधमसिंह नगर से हल्द्वानी तक टैक्स चोरी का एक संगठित और बेखौफ सिंडिकेट धड़ल्ले से चल रहा है, जो सरकार को हर दिन करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे बड़े स्टॉकिस्ट और कथित ट्रांसपोर्ट कारोबारी हैं, जो बिना किसी डर के इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिस्टम की नाक के नीचे यह सब हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी या तो आंखें मूंदे बैठे हैं या फिर उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश से रोजाना सैकड़ों ट्रक किराना, कपड़ा, जूते, कॉस्मेटिक और तंबाकू जैसे सामान लेकर ऊधमसिंह नगर की सीमा में प्रवेश करते हैं। इन ट्रकों में लदे माल का बड़ा हिस्सा बिना बिल या फर्जी बिलों के जरिए लाया जाता है। कई मामलों में आधा माल कागजों में दिखाया जाता है, जबकि बाकी माल पूरी तरह टैक्स चोरी के दायरे में होता है।
यही नहीं, ऊधमसिंह नगर को इस अवैध नेटवर्क का ट्रांजिट हब बना दिया गया है। यहां बड़े वाहनों से माल उतारकर छोटे वाहनों में “पलटी” की जाती है और फिर इसे हल्द्वानी की ट्रांसपोर्ट लाइनों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद तथाकथित “पहाड़ा लाइन” के जरिए यह माल पहाड़ी जिलों में खपा दिया जाता है—बिना किसी रोक-टोक के।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यह पूरा नेटवर्क इतने बड़े स्तर पर काम कर रहा है, तो राज्य कर विभाग आखिर कर क्या रहा है? क्या यह महज लापरवाही है या फिर मिलीभगत? क्योंकि पहले भी ऐसे सिंडिकेट का खुलासा हो चुका है, लेकिन कुछ समय की सख्ती के बाद फिर वही खेल शुरू हो गया।
साफ है कि अगर इस संगठित टैक्स चोरी पर तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो “जीरो टॉलरेंस” सिर्फ नारा बनकर रह जाएगा और सरकारी खजाने को इसी तरह लगातार चूना लगता रहेगा।
